MP Nigam Mandal: मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच अब निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। प्रदेश की राजनीतिक हलचल के केंद्र में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जो अपने उन 5 खास चहेतों को मंत्री पद का दर्जा दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जो पिछले चुनावों में हार का सामना कर चुके हैं।
सिंधिया के वो ‘पांच रत्न’ कौन?
सिंधिया जिन नामों को लेकर अड़े हुए हैं, वे सभी उनके कट्टर समर्थक माने जाते हैं और 2020 के तख्तापलट में उनके साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे। जिनमें…
इमरती देवी (पूर्व मंत्री)
महेंद्र सिंह सिसोदिया (पूर्व मंत्री)
ओपीएस भदौरिया (पूर्व मंत्री)
गिरिराज दंडोतिया (पूर्व नेता)
मुन्नालाल गोयल (पूर्व विधायक)
वक्त के साथियों का सम्मान जरूरी
सूत्रों के अनुसार, सिंधिया का स्पष्ट कहना है कि ये वे नेता हैं, जिन्होंने सिंधिया के एक इशारे पर अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगाकर कांग्रेस छोड़ी और भाजपा की सरकार बनाने में मदद की। भले ही ये नेता चुनाव हार गए हों, लेकिन इनका राजनीतिक वजूद कम नहीं आंका जा सकता। इसी नैतिक जिम्मेदारी के चलते सिंधिया इन्हें निगम-मंडलों में पद और कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिलाने के लिए दिल्ली से भोपाल तक सक्रिय हैं।
भाजपा में अंदरूनी खींचतान?
नगर निगमों में एल्डरमैन की पहली सूची जारी होने के बाद अब सबकी निगाहें बड़े निगम-मंडलों और विकास प्राधिकरणों पर टिकी हैं। भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं और सिंधिया खेमे के बीच संतुलन बनाना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संगठन के लिए बड़ी चुनौती साबित होता जा रहा है।
अब आगे क्या?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या भाजपा नेतृत्व सिंधिया की इस ज़िद के आगे झुकेगा या फिर परफॉर्मेंस के आधार पर नई नियुक्तियां होंगी? फिलहाल, सिंधिया की इस घेराबंदी ने पार्टी के अंदर हलचल मचा दी है।


