डिंडोरी /खबर डिजिटल/ शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने प्रशासनिक सक्रियता और नागरिक जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। उन्होंने ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, अपने शासकीय बंगले पर स्वयं अपना जनगणना (Census) फॉर्म ऑनलाइन भरा।
इस पहल के जरिए उन्होंने न केवल जिले के नागरिकों को जनगणना के प्रति जागरूक किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि देश के विकास में सटीक आंकड़ों की क्या भूमिका है।
कलेक्टर ने पहले स्वयं फॉर्म भरकर यह सिद्ध किया कि तकनीकी माध्यमों का उपयोग करना न केवल आसान है बल्कि सुरक्षित भी है। और आप 2से 3 मिनट में पूरा फार्म भर सकते हैं। आप ऑनलाइन फॉर्म 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक भर सकते हैं। और 1मई से 31 मई के बीच प्रगणक आपके घर आकर जानकारी दर्ज करेंगे। इस फार्म में किसी भी तरह का दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने जोर दिया कि जनगणना के माध्यम से मिलने वाले आंकड़े ही भविष्य की सरकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे और जनहितैषी नीतियों का आधार बनते हैं।
इस अवसर पर उन्होंने जिले के समस्त नागरिकों से आह्वान किया कि वे भी इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रियता से भाग लें और अपनी जानकारी पूरी ईमानदारी व शुद्धता के साथ दर्ज कराएं।
कलेक्टर ने जिले के संबंधित अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि वे फील्ड स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी परिवार या व्यक्ति इस प्रक्रिया से न छूटे।
उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए प्रगणकों (Enumerators) को प्रशिक्षित रहने और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
”जब हम अपनी सही जानकारी देते हैं, तभी सरकार हमारे लिए सही योजनाएं बना पाती है। यह राष्ट्र निर्माण में हमारा व्यक्तिगत योगदान है।” — कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया डिंडोरी ।
कलेक्टर ने अपना डिजिटल जनगणना फॉर्म भरने के बाद तकनीक की सहजता पर विशेष चर्चा की। उन्होंने आम जनमानस का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि डिजिटल माध्यम से फॉर्म भरना बेहद सरल और पारदर्शी प्रक्रिया है।
कलेक्टर ने बताया कि इस फॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके। उन्होंने साझा किया कि इसमें बहुत ही सामान्य और जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी जानकारियां पूछी गई हैं, जैसे:
आवास की स्थिति: आपके मकान की छत पक्की है या कच्ची?
स्वच्छता की उपलब्धता: क्या आपके घर में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है?
जल आपूर्ति: आपके परिवार के लिए पानी की क्या और कैसी व्यवस्था है?आप ईंधन के रुप में क्या इस्तेमाल करते हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इन सरल सवालों के पीछे का उद्देश्य जिले के हर नागरिक की जीवनशैली और जरूरतों को समझना है। जब प्रशासन के पास यह जानकारी होगी कि कितने घरों में पक्की छत या पानी की सुविधा है, तभी उन क्षेत्रों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं का खाका तैयार किया जा सकेगा।
उन्होंने नागरिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “डिजिटल फॉर्म भरना बहुत आसान है। इसमें पूछी गई छोटी-छोटी बातें ही भविष्य में जिले की बड़ी समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त करेंगी।


