MP TET Protest: मध्य प्रदेश में एक बार फिर शिक्षक आंदोलन की तपिश महसूस की जा रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा TET की अनिवार्यता के खिलाफ प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। राजधानी भोपाल के दशहरा मैदान में हजारों की संख्या में जुटे शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो गर्मियों की छुट्टियों के बाद 16 जून से स्कूल खुलने पर कोई भी शिक्षक ड्यूटी पर नहीं जाएगा और स्कूलों में तालाबंदी की जाएगी।
क्यों भड़के हैं शिक्षक?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2005 और 2009 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए भी TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 15-20 वर्षों से लाखों बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। ऐसे में इतने लंबे अनुभव के बाद अब पात्रता परीक्षा देना उनके स्वाभिमान और अनुभव का अपमान है। नियमों के मुताबिक, जो शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें रिटायर कर दिया जाएगा या उन्हें नौकरी छोड़नी होगी।
16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल
प्रदेश में वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। शिक्षकों ने रणनीति बनाई है कि जैसे ही 16 जून को स्कूल दोबारा खुलेंगे, वे सामूहिक रूप से काम का बहिष्कार करेंगे। अध्यापकों का कहना है कि जब शिक्षक ही स्कूल नहीं जाएंगे, तो ताले लगना तय है। इस हड़ताल से प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
विभाग की लेटलतीफी
शिक्षकों में नाराजगी का एक बड़ा कारण स्कूल शिक्षा विभाग का टालमटोल वाला रवैया भी है। विभाग ने पहले भरोसा दिलाया था कि वह कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। शिक्षकों का कहना है कि विभाग केवल सांत्वना दे रहा है, जबकि रिव्यू पिटीशन दाखिल करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है और किन्हें नहीं।
सरकार के सामने चुनौती
एक तरफ अदालती आदेश का पालन करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ डेढ़ लाख अनुभवी शिक्षकों का भविष्य। अब देखना होगा कि 16 जून से पहले मोहन सरकार इस तालाबंदी को रोकने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालती है।


