खस्ताहाल वाहनों पर देर से कार्रवाई, वर्षों से जोखिम में सफर कर रहे थे यात्री
सौरभ श्रीवास्तव संवाददाता कटनी— जिले में वर्षों से यात्रियों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर दौड़ रही 15 साल से अधिक पुरानी बसों पर आखिरकार परिवहन विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी देर तक इन खतरनाक वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति कैसे मिलती रही?परिवहन विभाग द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत अब 15 वर्ष से अधिक पुरानी यात्री बसों को सड़कों से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कटनी जिले में ऐसी कुल 66 बसें चिन्हित की गई हैं, जिन्हें पंजीयन निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।जानकारों की मानें तो ये बसें लंबे समय से तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतर रही थीं, इसके बावजूद इनका संचालन जारी रहा। इससे न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी, बल्कि कई बार हादसों की आशंका भी बनी रही।स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण ही ये जर्जर बसें सालों तक सड़कों पर दौड़ती रहीं। अब जब सख्ती दिखाई जा रही है, तो यह कार्रवाई सवालों के घेरे में है कि क्या यह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगी या वास्तव में सड़कों से ऐसे वाहनों को हटाया जाएगा।प्रदेश सरकार भले ही सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन व्यवस्था की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि समय रहते कार्रवाई न होने से यात्रियों की जान के साथ लंबे समय तक खिलवाड़ होता रहा। अब देखना होगा कि यह अभियान कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है और क्या वाकई लोगों को सुरक्षित सफर मिल पाएगा।


