Mohan Cabinet Expansion: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार जल्द ही अपनी टीम में नए चेहरों को शामिल करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की दिल्ली में आलाकमान के साथ हुई मैराथन बैठकों के बाद कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं चरम पर हैं। सूत्रों की मानें तो नवरात्रि के शुभ अवसर पर प्रदेश को 4 से 5 नए मंत्री मिल सकते हैं। इस बार भाजपा मध्य प्रदेश में भी “गुजरात फॉर्मूला” लागू करने के मूड में दिख रही है, जिससे कई समीकरण बदल सकते हैं।
चार खाली पदों के लिए मची होड़
वर्तमान में एमपी कैबिनेट में 31 मंत्री हैं, जबकि नियमों के मुताबिक चार पद अभी भी खाली हैं। सरकार की योजना इन पदों को भरकर 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को साधने की है। दिल्ली में कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकातों ने अटकलों को और हवा दी है। चर्चा है कि कुछ ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ मंत्रियों की छुट्टी कर उन्हें संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठों को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिल सकती है।
इन नामों पर टिकी हैं सबकी निगाहें
कैबिनेट की नई लिस्ट में अनुभव और युवा जोश का मिश्रण देखने को मिल सकता है। जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे इस प्रकार हैं। 9 बार के विधायक गोपाल भार्गव अनुभव के आधार पर रेस में सबसे आगे हैं। इंदौर से मालिनी गौड़ और बुरहानपुर से अर्चना चिटनीस के नाम पर विचार संभव है। इस कोटे से बृजेंद्र सिंह यादव को फिर से मौका मिल सकता है। शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, कमलेश शाह और आदिवासी कोटे से कुछ वरिष्ठ विधायकों के नाम भी सुर्खियों में हैं।
निगम-मंडलों में भी महा-लिस्ट तैयार
सिर्फ कैबिनेट ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न निगमों, मंडलों और विकास प्राधिकरणों में भी नियुक्तियों का पिटारा खुलने वाला है। विनोद गोटिया और आशुतोष तिवारी जैसे संगठन के पुराने दिग्गजों को अहम पदों से नवाजा जा सकता है। इसके अलावा बड़ी फौज में ले तो रामनिवास रावत, अरविंद भदौरिया, इमरती देवी, कमल पटेल, केपी यादव, ध्रुव नारायण सिंह और आशीष अग्रवाल जैसे नेताओं को भी सत्ता में हिस्सेदारी मिलने की पूरी उम्मीद है।


