Monday, November 2, 2026
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शहपुरा अस्पताल में आयुष्मान योजना की राशि में गड़बड़ी, डॉक्टर से होगी वसूली

डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, विकासखंड शहपुरा के खंड स्तरीय अस्पताल में आयुष्मान भारत निरामय योजना की प्रोत्साहन राशि बांटने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कलेक्टर की जांच में डॉक्टर और कर्मचारियों को नियम से ज्यादा पैसा देने की बात सामने आई है। इस मामले में कलेक्टर ने उच्च अफसरों को पत्र लिखकर डॉ. सत्येन्द्र परस्ते के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।खबर डिजिटल ने लगातार 17/12/2025 को और 24/12/2025 को प्रमुखता के साथ इस मामले को प्रकाशित किया था।

क्या है पूरा मामला?

शहपुरा अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। कुछ लोगों ने शिकायत की थी कि इस राशि के बंटवारे में धांधली हो रही है। कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक जांच समिति बनाई। इस समिति में एसडीएम शहपुरा, पेंशन अधिकारी, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी और जिला आयुष्मान समन्वयक शामिल थे। जांच में कई जगह लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी के सबूत मिले।

तत्कालीन मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्येन्द्र परस्ते अब मेंहदवानी में पदस्थ हैं। जांच में सामने आया कि वे प्रशासनिक अधिकारी होते हुए भी डॉक्टर के रूप में बाकी डॉक्टरों से कई गुना ज्यादा प्रोत्साहन राशि ले रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार डॉ. परस्ते ने मेडिकल स्पेशलिस्ट के नाम पर 30% की दर से 7 लाख 1 हजार 992 रुपये लिए। जबकि नियम के अनुसार उन्हें मेडिकल ऑफिसर के रूप में सिर्फ 10% की दर से 2 लाख 33 हजार 997 रुपये ही मिलने चाहिए थे।

यानी उन्होंने 4 लाख 67 हजार 994 रुपये ज्यादा लिए। जांच में यह भी मिला कि ड्यूटी रोस्टर में नाम न होने के बाद भी उन्होंने स्पेशलिस्ट के रूप में राशि ली। कुछ कर्मचारी एक साल से ज्यादा मातृत्व अवकाश पर थे, फिर भी उन्हें उस समय की प्रोत्साहन राशि दे दी गई। वार्डबॉय का काम न करने वाले कर्मचारी आशुतोष रजक के खाते में भी पैसा डाला गया। कुछ कर्मचारियों का तबादला हो जाने के बाद भी उन्हें राशि दी जाती रही।

डॉ. सत्येन्द्र परस्ते ने अपने जवाब में कहा है कि वे मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर रहे थे। इसलिए उन्हें 30% की दर से राशि मिलना सही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अपनी राय में कहा कि जांच दल ने कागजों की ठीक से जांच किए बिना ही रिपोर्ट दे दी है। वहीं डॉ. परस्ते के जवाब और जांच रिपोर्ट में कई बातें एक-दूसरे से अलग हैं।

कलेक्टर ने सभी कागज, जांच रिपोर्ट, डॉक्टर का जवाब और सीएमएचओ की राय देखने के बाद माना कि इस मामले में पूरी विभागीय जांच जरूरी है। इसीलिए डॉ. सत्येन्द्र परस्ते के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की सिफारिश की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में अंतिम फैसला लिया जाएगा। आयुष्मान योजना गरीबों के इलाज के लिए है। इस योजना के पैसों में गड़बड़ी को सरकार गंभीरता से ले रही है। इस कार्रवाई से साफ है कि सरकारी योजनाओं में धांधली करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

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