MP Petrol-Diesel Hike: मध्य प्रदेश में आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बड़ा बोझ पड़ा है। तेल कंपनियों द्वारा देश भर सहित सूबे में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर तगड़ा इजाफा किया गया है। भोपाल में पिछले 10 दिनों के अंदर यह तीसरी बढ़ोतरी है, जिसके बाद पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगे हैं। ईंधन की इन लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास आर्थिक संकट से निपटने का कोई समाधान नहीं है।
भोपाल में ईंधन के नए दाम
ताजा बढ़ोतरी के बाद भोपाल के बाजारों में पेट्रोल-डीजल और प्रीमियम फ्यूल की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं। भोपाल में डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब राजधानी में डीजल का दाम 96.85 रूपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। वही पेट्रोल के दामों में भी 87 पैसे प्रति लीटर की बढ़त दर्ज की गई है, जिससे अब आम उपभोक्ताओं को एक लीटर पेट्रोल के लिए 111.71 रूपए चुकाने पड़ रहे हैं। हाई-परफॉर्मेंस स्पीड फ्यूल की कीमतों में 94 पैसे की तेजी आई है और यह अब 121.03 रूपए प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने के अंदर एमपी की जनता पर प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर करीब 5 रूपए तक का अतिरिक्त भार डाला जा चुका है।
डीजल महंगा होगा सब महंगा
ईंधन के दामों में लगी इस आग पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उमंग सिंघार ने कहा कि प्रधानमंत्री इस समय देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के बजाय विदेश दौरों और अपनी इवेंट पॉलिटिक्स में व्यस्त हैं, जबकि देश का आम नागरिक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार को समझना चाहिए कि डीजल के दाम बढ़ना सिर्फ एक आंकड़े का बढ़ना नहीं है। जब डीजल महंगा होता है, तो मालभाड़ा सीधे तौर पर महंगा हो जाता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर यह होगा कि बाजार में आम जनता की जरूरत की चीजें जैसे सब्जियां, राशन, दूध और जीवनरक्षक दवाइयां सब महंगी हो जाएंगी।
जनता की परीक्षा ले रही है सरकार
उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लगाए जा रहे अत्यधिक वैट और सेस को भी इस महंगाई की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि सरकार टैक्स कम करके जनता को 12 रूपए से 15 रूपए तक की राहत दे सकती है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है। उन्होंने चेताया कि महंगाई अब केवल एक सामान्य आर्थिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह देश और प्रदेश की गरीब व मध्यमवर्गीय जनता के धैर्य और उनकी मजबूरी की एक कठिन परीक्षा बन चुकी है।
