जबलपुर। स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत 58 लाख रुपए के खर्च को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं का नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) प्रमाणीकरण नहीं कराने पर NHM की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणव नागवंशी ने CMHO समेत चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नोटिस जारी होने के 22 दिन बाद भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में खर्च की गई राशि की रिकवरी और एफआईआर जैसी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
58 लाख खर्च, लेकिन एक भी संस्था का नहीं हुआ प्रमाणीकरण
जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में जबलपुर जिले की 58 संजीवनी क्लीनिकों को NQAS मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रति संस्था एक लाख रुपए के हिसाब से कुल 58 लाख रुपए आवंटित किए गए थे।
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक इनमें से 56.98 लाख रुपए खर्च भी कर दिए गए। हालांकि राज्य स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आया कि जिले की एक भी शहरी स्वास्थ्य संस्था का NQAS प्रमाणीकरण नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, अधिकांश संस्थाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर भी खरी नहीं उतरीं।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस
NHM द्वारा जारी नोटिस में तत्कालीन और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। इनमें शामिल हैं:
- CMHO डॉ. नवीन कोठारी
- सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव
- जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग
- जिला लेखा प्रबंधक रेखा साहू
विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में खर्च की गई राशि की वसूली संबंधित अधिकारियों से की जा सकती है।
पुराने कार्यों को दिखाकर खर्च का आरोप
मामले में आरोप है कि NQAS प्रमाणीकरण की तैयारी के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। संस्थाओं में सीमित स्तर पर रंगरोगन और पहले से किए गए कार्यों को दोबारा दिखाकर सरकारी धन खर्च दर्शाया गया।
बताया जा रहा है कि राज्य स्तर की जांच टीम ने निरीक्षण के दौरान कार्यों की गुणवत्ता और खर्च के दावों पर गंभीर आपत्ति जताई थी।
निविदा प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप
नियमों के अनुसार 58 लाख रुपए के कार्यों के लिए खुली निविदा प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य था। लेकिन आरोप है कि खरीद और कार्य आवंटन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर सामग्री खरीद दिखाकर कुछ चुनिंदा वेंडरों को लाभ पहुंचाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसी आधार पर वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
4 मई को जारी हुआ था नोटिस
सूत्रों के मुताबिक भोपाल स्तर से 4 मई को ही नोटिस जारी कर दिया गया था। हालांकि मामला सार्वजनिक रूप से सामने आने में समय लगा। प्रशासनिक हलकों में इस प्रकरण को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी।
अब समय सीमा समाप्त होने के बावजूद जवाब नहीं मिलने से अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
वर्तमान CMHO ने खुद को बताया अलग
वर्तमान CMHO डॉ. नवीन कोठारी ने कहा कि उन्हें एक माह पहले ही जबलपुर का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बनाया गया है। उनके अनुसार जिस अवधि में राशि स्वीकृत और खर्च की गई, उस समय विभाग की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों के पास थी। उन्होंने कहा कि भुगतान और प्रशासनिक निर्णय उस समय के अधिकारियों द्वारा लिए गए थे, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
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