मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर मतदान होना है, जिसमें से एक सीट कांग्रेस के कब्जे में जाने की संभावना जताई जा रही है. इसी बीच कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों की सूची धीरे-धीरे सामने आने लगी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. हालांकि पार्टी में यह चर्चा भी है कि किसी बाहरी नेता को भी टिकट दिया जा सकता है.
जून में होने वाले हैं राज्यसभा चुनाव
प्रदेश से कांग्रेस की खाली हो रही सीट वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह की है. दिग्विजय सिंह ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह जून में होने वाले चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे. उनके इस फैसले के बाद पार्टी को नए उम्मीदवार चुनने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. इस स्थिति में कमलनाथ का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों की सूची में ऊपर माना जा रहा है.
कांग्रेस के पास राज्यसभा उम्मीदवारों की लंबी सूची
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पास राज्यसभा उम्मीदवारों की लंबी सूची है. इसमें राज्य से जीतू पटवारी, अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं. वहीं, बाहरी नेताओं में मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, बीके हरिप्रसाद और सुप्रिया श्रीनेत के नाम सामने आए हैं. महिला उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन का नाम भी विचाराधीन है. हालांकि मध्य प्रदेश की सीट के लिए स्थानीय और प्रभावशाली नेता को प्राथमिकता देने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है.
कमलनाथ का नाम सबसे आगे
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ ही ऐसे नेता हैं जिनका प्रदेश में व्यापक स्वीकार्यता है. उनके नाम पर पार्टी के विधायकों के एकजुट रहने की संभावना अधिक है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है, जैसा कि कांग्रेस को हरियाणा और ओडिशा में पहले भी देखने को मिला है. इसलिए पार्टी किसी ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाना चाहेगी जो विधायकों को साथ रखने में सक्षम हो.
राज्यसभा चुनाव के लिए कमर कस चुकी है कांग्रेस
मध्य प्रदेश की तीन सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है. यह सीट कांग्रेस के लिए काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को सीमित संख्या में ही सीटें मिल रही हैं. ऐसे में अगले कुछ दिनों में कांग्रेस आलाकमान का निर्णय प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है और यह तय करेगा कि पार्टी इस महत्वपूर्ण चुनाव में कैसे रणनीति अपनाती है.
