मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है. एक जून से नामांकन दाखिल करने का दौर शुरू हो चुका है और इसके साथ ही राजनीतिक दलों के भीतर उम्मीदवारों को लेकर मंथन भी तेज हो गया है. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर माना जा रहा है कि तीन में से दो सीटें भाजपा के खाते में जा सकती हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस के हिस्से में आने की संभावना है.
कांग्रेस को सता रहा है ये डर
हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी तय मानी जा रही सीट को सुरक्षित रखना है. पार्टी को आशंका है कि मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की स्थिति बन सकती है, जिससे उसका समीकरण प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि कांग्रेस ऐसा उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है, जो सभी विधायकों को एकजुट रखने में सक्षम हो और चुनावी जोखिम को कम कर सके.
कांग्रेस जल्द प्रत्याशी की करेगी घोषणा
फिलहाल दोनों प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं. इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संकेत दिए हैं कि कांग्रेस जल्द ही अपने प्रत्याशी की घोषणा करेगी. भोपाल में आयोजित आदिवासी कांग्रेस की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि 3 से 5 जून के बीच पार्टी अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला कर सकती है. राजनीतिक सूत्रों की मानें तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम कांग्रेस की ओर से सबसे चर्चित दावेदारों में शामिल है. हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और दिल्ली में होने वाली चर्चाओं के बाद ही लिया जाएगा. इसलिए फिलहाल किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है.
भाजपा सोच विचार में लगी हुई
दूसरी ओर भाजपा भी उम्मीदवार चयन को लेकर विचार-विमर्श में जुटी हुई है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक प्रस्तावित है और संभावित उम्मीदवारों के नामों का पैनल पहले ही दिल्ली भेजा जा चुका है. पार्टी के भीतर जिन नेताओं के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं, उनमें अभय महाजन, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, लाल सिंह आर्य और नरोत्तम मिश्रा प्रमुख माने जा रहे हैं. वहीं वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी भी एक और कार्यकाल के लिए प्रयासरत बताए जा रहे हैं.
तीसरी सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
सबसे अधिक चर्चा तीसरी सीट को लेकर हो रही है. भाजपा के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है और दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास अतिरिक्त वोट बचते हैं. यही कारण है कि कांग्रेस संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर सतर्क दिखाई दे रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा फिलहाल तीसरी सीट को लेकर अपनी रणनीति सार्वजनिक नहीं करेगी. पार्टी कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार कर रही है और उसके बाद ही आगे की चुनावी चाल तय कर सकती है.
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