डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ शाहपुर डिंडोरी, जिंदगी और मौत के बीच का फासला कितना बारीक होता है, इसका एक दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाला अहसास मंगलवार को डिंडोरी के ग्राम बरछा में हुआ। बरछा गांव में एक परिवार के दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने आईं संपत्तियां उद्दे और लक्ष्मी बाई उद्दे मंगलवार सुबह करीब 9 बजे गांव के तालाब में नहाने पहुंची थीं। नहाने के दौरान संपत्तियां का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गईं। उनका हाथ पकड़े होने के कारण लक्ष्मी बाई भी संतुलन खो बैठीं और दोनों डूबने लगीं।
नहाने गईं दो महिलाएं क्या जानती थीं कि पानी की नीरवता के पीछे मौत का सन्नाटा छिपा बैठा है। पलक झपकते ही दोनों महिलाएं गहरे पानी में समाने लगीं, और तालाब की खामोशी चीखों में बदल गई।
एक नौजवान नोहर सिंह के कानों में जब वो चीखें पड़ीं, तो उसने न अपनी जान की परवाह किए वगैर बिना एक पल गंवाए, उसने तालाब में छलांग लगा दी।
अदम्य साहस और कड़ी मशक्कत के बल पर उसने लक्ष्मीबाई उद्दे को मौत के जबड़े से खींच निकाला और किनारे पर ले आया।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। युवक दोबारा पानी की गहराइयों में उतरा, संपतिया बाई को तलाशने की हर मुमकिन कोशिश की, पर संपतिया बाई उद्दे पानी के उस अंधेरे में बहुत दूर जा चुकी थीं, जहां से लौट पाना मुमकिन नहीं था।
जब संपतिया बाई का निष्प्राण शरीर किनारे पर लाया गया, तो बरछा गांव में ऐसा सन्नाटा पसर गया जो पत्थर से पत्थर दिल को भी पिघला दे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था—उनकी चीखों ने वहां खड़े हर ग्रामीण की आंखें नम कर दीं। एक तरफ लक्ष्मीबाई के सकुशल लौटने की राहत थी, तो दूसरी तरफ संपतिया बाई को खो देने का गम।
ग्रामीणों का कहना है कि “युवक ने अपनी जान पर खेलकर एक मां, एक बहन की सांसें लौटा दीं। अगर वो एक पल भी देर करता तो शायद आज दो घरों के चिराग बुझ चुके होते। उसका यह अहसान गांव कभी नहीं भूलेगा।”
सूचना मिलते ही शाहपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतका के शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की।
