Monday, November 2, 2026
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Wing Commander Arrest: हनीट्रैप में फंसा वायुसेना का विंग कमांडर… दुश्मन देश को भेजी संवेदनशील जानकारी

4 महीने के ऑपरेशन में खुला जासूसी नेटवर्क

नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और भारतीय वायुसेना की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट ने चार महीने तक चले एक गोपनीय ऑपरेशन के बाद 44 वर्षीय एक विंग कमांडर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिकारी सोशल मीडिया के जरिए बिछाए गए हनीट्रैप में फंस गया था और इसके बाद उसने सीमा पर सैनिकों की तैनाती तथा गोपनीय सैन्य दस्तावेजों से जुड़ी संवेदनशील रणनीतिक सूचनाएं कथित तौर पर दुश्मन देश तक पहुंचाईं। जांच एजेंसियों की पड़ताल में जासूसी नेटवर्क के काम करने के तरीके को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी को सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में आए एक कथित विदेशी हैंडलर के निर्देश पर संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के लिए तैयार किया गया था।

सहकर्मी के मोबाइल में मालवेयर डालने की साजिश
जांच में सामने आया कि कथित हैंडलर ने विंग कमांडर को उसके एक सहकर्मी के मोबाइल फोन में एक मैलिशियस ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस ऐप का इस्तेमाल मोबाइल डिवाइस पर गुप्त तरीके से नियंत्रण हासिल करने के लिए किया जाना था।अधिकारियों के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर रिमोट-एक्सेस मालवेयर की तरह काम कर सकता था। इसके जरिए डिवाइस की लोकेशन पर नजर रखने, कॉल और संदेशों तक पहुंच बनाने तथा फोन में मौजूद डेटा हासिल करने की कोशिश की जा सकती थी। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि कथित साजिश केवल गोपनीय सैन्य सूचनाएं हासिल करने तक सीमित नहीं थी।

जनवरी में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से मिला सुराग
जासूसी नेटवर्क की जांच का सिलसिला जनवरी में शुरू हुआ। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दौरान एक कथित पाकिस्तानी इंटेलिजेंस नंबर और भारतीय मोबाइल नंबर के बीच लगातार एन्क्रिप्टेड बातचीत का पता लगाया। जांच आगे बढ़ने पर भारतीय नंबर का संबंध भारतीय वायुसेना के एक सक्रिय विंग कमांडर से सामने आया। इसके बाद वायुसेना की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट ने अधिकारी की गतिविधियों पर फिजिकल और डिजिटल सर्विलांस बढ़ा दिया। कई महीनों तक निगरानी और सबूत जुटाने के बाद एजेंसियों ने कार्रवाई की।

30 मई को वायुसेना ने की औपचारिक शिकायत
जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद भारतीय वायुसेना ने 30 मई को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और आरोपी अधिकारी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हवाले किया। इसके बाद अधिकारी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद तिहाड़ जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसियों ने मामले से जुड़े डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।

30 जुलाई को अदालत में दाखिल हुई चार्जशीट
मामले में जांच पूरी करने के बाद 30 जुलाई को अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई। इसमें आरोपी अधिकारी पर संवेदनशील सैन्य सूचनाओं को कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क तक पहुंचाने और जासूसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी से कथित तौर पर कौन-कौन सी सूचनाएं साझा कराई गईं, विदेशी हैंडलर से उसका संपर्क किस स्तर तक था और इस नेटवर्क में उसके अलावा कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। मामले की जांच के दौरान सामने आए डिजिटल साक्ष्यों को भी अहम माना जा रहा है।

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