खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी-– कटनी वन मंडल ने इस वर्ष पौधरोपण को महज पौधे लगाने तक सीमित न रखते हुए इसे वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वन क्षेत्रों के 47 चयनित स्थलों पर करीब 11.5 लाख पौधे रोपे गए हैं। विभाग ने पौधों की बेहतर वृद्धि, जल संरक्षण और रोपण स्थलों की सुरक्षा के लिए कई नवाचारी उपाय भी किए हैं।पौधरोपण स्थलों पर जैविक खाद तैयार करने के लिए 50 कम्पोस्ट गड्ढे बनाए गए। इनमें वन क्षेत्र से प्राप्त जैविक सामग्री, गोबर स्लरी और ऊपरी मिट्टी का उपयोग किया गया। वहीं पौधों को प्राकृतिक पोषण देने के लिए मौके पर ही जीवामृत तैयार किया गया। अब तक करीब 9,400 लीटर जीवामृत का उपयोग पौधों में किया जा चुका है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया गया है।ड्रोन से निगरानी, हर गतिविधि पर नजरपौधरोपण कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी चयनित स्थलों की ड्रोन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। इससे पौधरोपण की स्थिति, कार्य की प्रगति और स्थल की निगरानी को बेहतर तरीके से दर्ज किया जा सका। विभाग ने पौधरोपण के बाद उपयोग में लाई गई पॉलीबैग्स को भी एकत्र कर सुरक्षित निपटान की व्यवस्था की, ताकि प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।35 हजार पौधों से तैयार हुई हरित बाड़वन क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बाड़ के किनारे 32,500 बांस और 2,500 सलई स्टम्प रोपे गए। कुल 35 हजार पौधों से तैयार की जा रही यह हरित बाड़ भविष्य में वन क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक उपयोगिता का माध्यम भी बन सकती है।55 चेकडैम से बारिश के पानी को रोकने की तैयारीवन क्षेत्रों में जल संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत 55 ब्रशवुड चेकडैम तैयार किए गए हैं। इनसे बारिश के पानी को रोकने और जमीन में पानी के पुनर्भरण में मदद मिलने की उम्मीद है। जल संरक्षण के इन उपायों का लाभ पौधों की वृद्धि के साथ आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को भी मिलने की संभावना है।जंगल के बीज से जंगल को फिर से समृद्ध करने की पहलइस पौधरोपण अभियान की खास बात यह भी रही कि वन क्षेत्रों से ही करीब 600 किलोग्राम बीज एकत्र कर उन्हीं क्षेत्रों में रोपण के लिए उपयोग किए गए। इनमें नीम, आंवला, करंज, अमलतास, इमली, हर्रा, सीताफल और महुआ जैसी स्थानीय एवं बहुउपयोगी प्रजातियां शामिल हैं। स्थानीय प्रजातियों के इस्तेमाल से जैव विविधता को मजबूत करने के साथ भविष्य में वन उपज और ग्रामीण आजीविका को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।वन विभाग का फोकस अब सिर्फ पौधों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उनके संरक्षण, बेहतर वृद्धि और वन क्षेत्रों को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने पर है। 47 स्थलों पर 11.5 लाख पौधों के साथ किए गए ये प्रयास आने वाले वर्षों में कटनी के वन क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097
