Monday, November 2, 2026
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UP Election 2027: रामपुर मनिहारन में BJP को लगेगा बड़ा झटका? मजबूत हुई सपा-कांग्रेस की पकड़, 2027 में किसकी होगी जीत

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग के लिए आरक्षित है. परिसीमन के बाद से ही यह सीट सुरक्षित श्रेणी में है, इसलिए यहां केवल एससी वर्ग से आने वाले उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकते हैं. विधानसभा की संख्या 6 है और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के देवेंद्र कुमार निम यहां से विधायक हैं.

2022 में बीजेपी ने दर्ज की थी बड़ी जीत

रामपुर मनिहारन में 2027 के चुनावी समीकरण को समझने के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े काफी अहम हैं. उस चुनाव में बीजेपी के देवेंद्र निम ने शानदार जीत दर्ज की थी.

2022 विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों को मिले वोट:

  • बीजेपी: 89,109 वोट
  • बसपा: 68,516 वोट
  • आरएलडी-सपा गठबंधन: 64,864 वोट
  • आजाद समाज पार्टी: 4,606 वोट
  • कांग्रेस: 1,544 वोट

बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र निम ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 24,245 वोटों के अंतर से हराया था. खास बात यह रही कि बसपा दूसरे स्थान पर रही और उसे आरएलडी-सपा गठबंधन से 3,652 वोट अधिक मिले.

इस चुनाव में बसपा को एससी वर्ग का मजबूत समर्थन मिला. वहीं आजाद समाज पार्टी ने भी बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में कुछ सेंध लगाई. कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा.

2024 लोकसभा चुनाव में बदली तस्वीर

2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर मनिहारन विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों ने सियासी तस्वीर में बदलाव के संकेत दिए. इस चुनाव में बीजेपी-आरएलडी गठबंधन और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा.

2024 लोकसभा चुनाव में मिले वोट:

  • बीजेपी-आरएलडी गठबंधन: 85,950 वोट
  • सपा-कांग्रेस गठबंधन: 84,393 वोट
  • बसपा: 42,541 वोट

बीजेपी गठबंधन महज 1,557 वोटों से आगे रहा. जबकि 2022 में बीजेपी की बढ़त 24 हजार से ज्यादा वोटों की थी. यानी दो साल के भीतर जीत का अंतर काफी कम हुआ.

वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के वोट में 2022 की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई. दूसरी ओर बसपा का वोट काफी घटा. इससे संकेत मिला कि बसपा का एक हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर गया हो सकता है.

2026 के आंकड़ों में घटे मतदाता

2026 में SIR के बाद रामपुर मनिहारन विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,99,402 मतदाता दर्ज हैं. 2024 लोकसभा चुनाव के समय यह संख्या 3,17,609 थी. यानी करीब 18,207 मतदाताओं की कमी हुई है.

यह बदलाव 2027 के चुनाव में भी राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है.

रामपुर मनिहारन का जातीय समीकरण

इस सीट पर जातीय समीकरण चुनावी नतीजों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • मुस्लिम: करीब 90 हजार
  • एससी: करीब 85 हजार
  • गुर्जर: करीब 45 हजार
  • सैनी: करीब 30 हजार
  • जाट: करीब 20 हजार
  • पाल-कश्यप: करीब 18 हजार
  • अन्य: करीब 15 हजार

सीट आरक्षित होने के कारण एससी वर्ग का वोट यहां सबसे अहम फैक्टर बन जाता है. हालांकि मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या के चलते उनका रुख भी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

2027 में किसके लिए क्या चुनौती?

बीजेपी की नजर ओबीसी, अति पिछड़े और सामान्य वर्ग के वोटों को मजबूत रखने के साथ हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने पर होगी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन एससी और मुस्लिम मतदाताओं के साथ पीडीए रणनीति के जरिए ओबीसी वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर सकता है.

जाट और गुर्जर मतदाताओं का रुख भी चुनावी तस्वीर बदल सकता है. 2024 में दोनों गठबंधनों के बीच कम हुआ अंतर बताता है कि 2027 में रामपुर मनिहारन की लड़ाई पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा दिलचस्प हो सकती है.

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