डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्य प्रदेश के राजस्व नक्शे पर डिंडौरी जिले ने अपनी ऐसी धमक जमाई है कि सूबे के बड़े-बड़े दिग्गजों की नजरें टिकी की टिकी रह गईं। सालों-साल तक कचहरियों में लटके रहने वाले जमीनी मुकदमों की भूलभुलैया को चीरते हुए, डिंडौरी प्रशासन ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर नीयत साफ हो और निगरानी कड़क, तो आम जनता की राह आसान होते देर नहीं लगती।
सीमांकन का सिकंदर: प्रदेश में मिला पहला पायदान
राजस्व के मोर्चे पर जारी ताज़ा रैंकिंग में डिंडौरी जिले ने जमीन के सीमांकन में पूरे मध्य प्रदेश में पहला स्थान रैंक 1 हासिल कर हर किसी को हैरत में डाल दिया है। जहां कभी एक-एक इंच जमीन के नपने में महीनों बीत जाते थे, वहीं अब प्रशासनिक कसावट का ही नतीजा है कि सीमांकन के मामलों को रॉकेट की रफ्तार से सुलझाया जा रहा है।
तीन मोर्चों पर डिंडौरी का रिपोर्ट कार्ड
सीमांकन रैंक 1 पूरे मध्य प्रदेश में सबसे अव्वल
बंटवारा रैंक 20 शीर्ष 20 जिलों में जगह मजबूत की
नामांतरण रैंक 40 पारदर्शिता के साथ तेजी से निपटारे की राह पर
कलेक्टर का कड़ा रुख और अफसरशाही पर कड़ा शिकंजा
जिले को इस बुलंद मुकाम तक पहुंचाने में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया का कुशल नेतृत्व और सख्त मॉनिटरिंग सबसे अहम वजह बनी है। लगातार ली जा रही समीक्षा बैठकों ने सरकारी मशीनरी को 24×7 अलर्ट मोड पर ला दिया है।
अधिकारियों को साफ हिदायत दी गई है कि आम जनता के काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नतीजा यह है कि अब मामलों का निराकरण सीधे तय समय-सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता से हो रहा है। जो काम पहले आम नागरिक के लिए सिरदर्द हुआ करता था, वही आज डिंडौरी मॉडल बनकर पूरे प्रदेश के लिए मिसाल पेश कर रहा है।
