Wednesday, November 4, 2026
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बचपन में मां को खोने वाले शिवराज पर फिर टूटा दुखों का पहाड़, मां समान काशीबाई ने ली अंतिम सांस

केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उनकी मां की तरह पूरे परिवार को संभालने वाली काशीबाई का शुक्रवार सुबह निधन हो गया. उन्होंने भोपाल के एम्स (AIIMS) अस्पताल में अंतिम सांस ली. 76 वर्षीय काशीबाई पिछले एक हफ्ते से अस्पताल में भर्ती थीं. सांस लेने में भारी तकलीफ के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा था.

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर 3 बजे सीहोर जिले स्थित उनके पैतृक गांव जैत में किया जाएगा. उनके चले जाने की खबर मिलते ही समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई है.

शिवराज सिंह ने रद्द किए सभी कार्यक्रम

मां के निधन की सूचना मिलते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तुरंत निरस्त कर दिए. शुक्रवार को उन्हें रायसेन में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन में शिरकत करनी थी, लेकिन इस दुखद घड़ी के कारण वे वहां नहीं जा सके. उनके आने वाले बाकी दौरों को भी फिलहाल टाल दिया गया है.

बचपन में छूट गया था मां का आंचल, काशीबाई ने दिया ममता का दुलार

शिवराज सिंह चौहान के जीवन में काशीबाई का दर्जा बहुत ऊंचा था. दरअसल, शिवराज जब बहुत छोटे थे, तभी उनकी सगी मां सुंदरबाई का देहांत हो गया था. इसके बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने बच्चों की परवरिश के लिए काशीबाई से दूसरा विवाह किया. काशीबाई ने कभी सगी और सौतेली मां का फर्क नहीं होने दिया. उन्होंने सभी बच्चों को मां जैसा अटूट प्यार दिया और पूरे परिवार को एक धागे में पिरोकर रखा. यही वजह है कि शिवराज उन्हें अपनी जन्मदात्री मां जितना ही सम्मान और दर्जा देते थे.

परिवार में शोक का माहौल

शिवराज सिंह चौहान के तीन भाई-बहन नरेंद्र सिंह चौहान, शशि और रोहित सिंह चौहान हैं. वहीं, काशीबाई के अपने बेटे वरुण सिंह चौहान पेशे से अधिवक्ता हैं.

काशीबाई भोपाल के साकेत नगर स्थित आवास में रहती थीं. बीते कुछ समय से उनकी सेहत ठीक नहीं चल रही थी. फेफड़ों में तकलीफ और सांस की समस्या बढ़ने पर उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों की पूरी टीम एक हफ्ते से उन्हें बचाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन शुक्रवार सुबह वे जिंदगी की जंग हार गईं. उनके पैतृक गांव जैत में अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं.

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