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सस्ती बिजली ही भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था को परिभाषित करेगी: अनिल अग्रवाल

नई दिल्ली : वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की अगली विकास यात्रा में सस्ती और सुरक्षित बिजली की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विचारों में अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) से संचालित भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच का संबंध बेहद निर्णायक होगा। उन्होंने तर्क दिया कि डेटा सेंटर्स, उन्नत विनिर्माण और खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा-गहन हैं, जिसके लिए भारत को अपनी उत्पादन और ट्रांसमिशन क्षमता को युद्ध स्तर पर मजबूत करना होगा।

वैश्विक परिदृश्य का उदाहरण देते हुए अग्रवाल ने बताया कि चीन ने अपनी बिजली अवसंरचना में दीर्घकालिक निवेश कर अमेरिका की तुलना में लगभग दोगुनी उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है, जो एआई के दौर में उसे बड़ी बढ़त दिला सकती है। इसके विपरीत, अमेरिका पहले से ही एआई विस्तार के कारण बिजली की कमी और बढ़ती लागत का सामना कर रहा है, जिससे उसकी औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है। अग्रवाल ने चेतावनी दी कि भारत को इस वैश्विक असंतुलन से सीख लेते हुए घरों, कारखानों और भविष्य के डेटा सेंटर्स के लिए सस्ती बिजली सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने चाहिए।

त्वरित कार्रवाई की वकालत करते हुए उन्होंने बिजली परियोजनाओं के लिए नीतिगत ढांचे को सरल बनाने और उत्पादन, ट्रांसमिशन तथा वितरण को एकीकृत करने वाली एक ‘एकल नीति’ (Single Policy) अपनाने का सुझाव दिया। अग्रवाल के अनुसार, ऐसी एकीकृत प्रणाली से कंपनियां एंड-टू-एंड परियोजनाओं को अधिक दक्षता के साथ पूरा कर सकेंगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि आज किए गए निर्णायक सुधार ही भारत को एआई-प्रेरित भविष्य में वैश्विक नेतृत्व दिला सकते हैं, अन्यथा देश तकनीकी प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकता है।

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