मुंबई: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा किए गए बड़े सुधारों को “ऐतिहासिक कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव भारत की वर्षों से पहचानी गई लेकिन कम विकसित हाइड्रोकार्बन क्षमता को तेजी से उजागर करने का मार्ग खोलेंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को बधाई दी, और कहा कि नए नियम देश में अन्वेषण और उत्पादन (Exploration and Production – E&P) को गति देने के लिए एक निर्णायक नीतिगत बदलाव का संकेत हैं।
नीतिगत सुधारों के प्रमुख लाभ
अनिल अग्रवाल के अनुसार, नए नियम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को कई तरह से मजबूत करेंगे:
- उत्पादन को बढ़ावा: ये सुधार भारत के अन्वेषण आधार को व्यापक बनाएंगे और वर्षों से कम विकसित पड़ी हाइड्रोकार्बन क्षमता को उपयोग में लाएंगे। अग्रवाल ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का कम से कम आधा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा कर सकता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: आयात पर निर्भरता कम होने से देश की ऊर्जा उपलब्धता और सुरक्षा मजबूत होगी, खासकर वैश्विक अस्थिरता के बीच।
- लागत प्रभावी उत्पादन: भारत दुनिया में सबसे किफायती तेल और गैस उत्पादक देशों में से एक बन सकता है, जिसका लाभ उपभोक्ताओं, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलेगा।
- समावेशी क्षेत्र: नए नियम ऊर्जा क्षेत्र को अधिक समावेशी बना देंगे। अब स्टार्ट-अप्स, युवा उद्यमी, इनोवेटर्स और विश्वविद्यालय के छात्र भी कम निवेश में अन्वेषण गतिविधियों की शुरुआत कर सकेंगे, जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा आएगी।
- निवेश को गति: विशेषज्ञ मानते हैं कि इन नीतिगत बदलावों से निवेश को गति मिलेगी और नए खिलाड़ी उद्योग में प्रवेश करेंगे।
अमेरिकी ऊर्जा क्रांति का उदाहरण
अग्रवाल ने अमेरिकी ऊर्जा क्रांति का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि वहाँ खुले और अनुकूल नीतिगत माहौल ने हजारों कंपनियों और व्यक्तियों को अन्वेषण में उतरने का अवसर दिया, जिससे अमेरिका एक बड़े आयातक से ऊर्जा-संपन्न राष्ट्र में बदल गया।
उन्होंने कहा, “भारत भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।”
अनिल अग्रवाल ने इस सुधार को “पीढ़ी में एक बार होने वाला सुधार” बताया।
