बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने OBC वर्ग के पदों पर तय सीमा से अधिक दिव्यांग उम्मीदवारों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों पर निर्धारित सीमा से ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवारों को केवल मेरिट के आधार पर नियुक्त करना कानूनी रूप से सही नहीं है।
तीन महीने में नई सूची तैयार करने के निर्देश
जस्टिस राकेश मोहन पांडेकी सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में अपनाई गई पद्धति समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप नहीं थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उमेश कुमार श्रीवास और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि डायरेक्टोरे ऑफ पब्लिक इंस्ट्रेक्शन ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। OBC वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने मेरिट सूची में स्थान हासिल किया था, लेकिन बाद में जारी प्रोविजनल मेरिट लिस्ट में OBC पदों पर दिव्यांग उम्मीदवारों की नियुक्ति तय 7 प्रतिशत सीमा से अधिक कर दी गई।
सामान्य OBC अभ्यर्थियों का प्रभावित हुआ अधिकार
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि तय सीमा से अधिक आरक्षण देने के कारण सामान्य OBC अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हुए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि चयन समिति द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण थी और इससे सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिला।
कोर्ट ने प्रक्रिया को बताया गलत
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों और तय सीमा का पालन जरूरी है। केवल मेरिट के आधार पर आरक्षित श्रेणी के भीतर अतिरिक्त नियुक्तियां करना नियमों के विपरीत माना जाएगा। अब राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशानुसार पूरी चयन प्रक्रिया की समीक्षा कर नई सूची जारी करनी होगी।
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