Sunday, November 1, 2026
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Effect of inflation: महंगाई की मार के लिए फिर हो जाए तैयार… तेल-साबुन से बिस्किट-ब्रेड हो सकते हैं महंगें

सितंबर में बढ़ सकती हैं FMCG उत्पादों की कीमतें

नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सामान खरीदने वाले लोगों को आने वाले महीने में महंगाई का एक और झटका लग सकता है। तेल, साबुन, बिस्किट और ब्रेड समेत कई FMCG उत्पादों की कीमतों में सितंबर से बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कंपनियां लागत बढ़ने के दबाव के बीच चुनिंदा उत्पादों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।

FMCG कंपनियां कर रही कीमत बढ़ाने की तैयारी
एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तिमाही में कई बड़ी FMCG कंपनियां चुनिंदा उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। इससे पहले जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाई थीं। अब बढ़ती इनपुट लागत और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहे दबाव के चलते दोबारा लक्षित मूल्य वृद्धि की तैयारी की जा रही है। कंपनियों के सामने चीनी, पाम ऑयल और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियां हैं। मानसून की स्थिति और अल नीनो के संभावित असर पर भी कंपनियों की नजर बनी हुई है। लागत को नियंत्रित करने के लिए कुछ कंपनियां पैकेट में उत्पाद की मात्रा घटाने के साथ चुनिंदा वस्तुओं के दाम बढ़ाने का विकल्प अपना सकती हैं।

ब्रिटानिया के बिस्किट हो सकते हैं महंगे
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज की ओर से कीमतों में एक और बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। खासतौर पर 5 और 10 रुपये वाले बिस्किट पैकेट पर करीब 1.5 से 2 प्रतिशत तक अतिरिक्त मूल्य वृद्धि की संभावना बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के एमडी एवं सीईओ रक्षित हरगवे ने कहा है कि चीनी और पाम ऑयल जैसे प्रमुख कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। ऐसे में चालू तिमाही में कीमतों में कुछ और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

गोदरेज भी बढ़ा सकती है दाम
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में अपने उत्पादों की कीमतों में औसतन करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि की थी। अब सितंबर तिमाही में भी कंपनी कीमतों में बदलाव कर सकती है। हालांकि, फिलहाल कंपनी कमोडिटी की लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का आकलन कर रही है और इसके बाद आगे की रणनीति तय करेगी।

डाबर पर भी बढ़ी लागत का दबाव
डाबर इंडिया भी बढ़ती उत्पादन लागत के असर से अछूती नहीं है। कंपनी को आशंका है कि इनपुट कॉस्ट का दबाव आगे भी बना रह सकता है। ऐसे में मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कुछ उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का विकल्प अपनाया जा सकता है।

HUL और टाटा कंज्यूमर भी कर सकते हैं बदलाव
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी सितंबर तिमाही में कई उत्पाद श्रेणियों की कीमतों में संशोधन कर सकती है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ही अपने कुछ उत्पादों के दाम 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाए थे। HUL की सीईओ और एमडी प्रिया नायर के मुताबिक, महंगाई की स्थिति को देखते हुए सितंबर तिमाही में भी कीमतों में बदलाव जारी रखा जा सकता है। वहीं, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एमडी सुनील डिसूजा ने भी संकेत दिया है कि लागत और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर उत्पादों की कीमतों में आगे बदलाव किया जा सकता है।

आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा असर
अगर कंपनियां सितंबर से कीमतों में बढ़ोतरी लागू करती हैं, तो इसका सीधा असर रोजमर्रा की खरीदारी के बजट पर पड़ सकता है। बिस्किट, साबुन, खाद्य तेल और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक खर्च में इजाफा होने की संभावना है।

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