गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली आयुष्मान भारत निरामयम योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. नियमों का उल्लंघन करने वाले 91 अस्पतालों को योजना के पैनल से हटा दिया गया है. जांच के दौरान इन अस्पतालों में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई. स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल के दिनों में किए गए निरीक्षण और ऑडिट में कई निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे. जांच रिपोर्ट के आधार पर उन अस्पतालों को डी-एम्पैनल कर दिया गया, जो योजना के मानकों का पालन नहीं कर रहे थे.
फर्जी क्लेम और अनावश्यक भर्ती के मामले आए सामने
विभागीय जांच में पाया गया कि कुछ अस्पतालों ने आयुष्मान योजना का गलत फायदा उठाने के लिए मरीजों को बिना आवश्यकता भर्ती दिखाया. कई मामलों में सामान्य बीमारी वाले मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती बताकर अधिक राशि का दावा किया गया. अधिकारियों के अनुसार, कुछ संस्थानों ने इलाज की वास्तविक जरूरत से अधिक खर्च दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने की कोशिश की. ऐसे मामलों को गंभीर मानते हुए संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों के पास आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. कई जगह विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पाई गई, जबकि कुछ अस्पतालों में लाइफ सपोर्ट सिस्टम जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी मानकों के अनुरूप नहीं थीं. इसके अलावा कुछ अस्पताल ऐसे भी मिले, जिन्होंने लंबे समय से आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार नहीं किया था. ऐसे संस्थानों की पात्रता की समीक्षा कर उन्हें भी पैनल से हटा दिया गया.
भोपाल में अब इतने अस्पताल ही रह गए मान्य
91 अस्पतालों को हटाए जाने के बाद भोपाल जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत मान्यता प्राप्त अस्पतालों की संख्या घटकर 263 रह गई है. इनमें 235 निजी और 28 सरकारी अस्पताल शामिल हैं. इन अस्पतालों में से 146 अस्पताल ऐसे हैं जिन्हें एनएबीएच की मान्यता प्राप्त है. इन संस्थानों में उपचार की गुणवत्ता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप मानी जाती है. आयुष्मान भारत निरामयम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मयंक अग्रवाल ने कहा कि योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने बताया कि मरीजों के हितों से खिलवाड़ करने और फर्जी दावे करने वाले संस्थानों पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो. इसी दिशा में आगे भी नियमित जांच और निगरानी की प्रक्रिया जारी रहेगी.
