Monday, November 2, 2026
Homeमध्यप्रदेशExclusive News: एमपी के इस शहर में 90 हजार लोगों का एक...

Exclusive News: एमपी के इस शहर में 90 हजार लोगों का एक साथ जा सकता है रोजगार… दुकानें-शोरूम और मॉल प्रभावित होने की आशंका

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बढ़ा खतरा

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद राजधानी भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों के भीतर बिना अनुमति संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। भोपाल नगर निगम एक बार फिर ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच और सीलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिन्होंने आवासीय भू-उपयोग वाले क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर दुकान, शोरूम, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। जानकारों के मुताबिक शहर के रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में से केवल करीब 15 प्रतिशत के पास ही वैध कमर्शियल अनुमति होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यदि बड़े पैमाने पर कार्रवाई होती है तो 90 हजार से अधिक दुकान, शोरूम और मॉल इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसका सीधा असर इन प्रतिष्ठानों से जुड़े करीब चार लाख से अधिक लोगों के रोजगार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

नियमों को दरकिनार कर शुरू कर दी गई व्यावसायिक गतिविधियां
राजधानी के कई विकसित आवासीय क्षेत्रों में स्वीकृत भू-उपयोग के विपरीत दुकानों, शोरूम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन शुरू कर दिया गया। अब भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित बदलाव से ऐसे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का लाभ मुख्य रूप से उन क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां नए परिक्षेत्र या भू-उपयोग का निर्धारण किया जा रहा है। भोपाल के जिन पुराने और विकसित आवासीय क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की जा रही है, वे पहले से स्वीकृत ले-आउट और निर्धारित भू-उपयोग वाले क्षेत्र हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में बाद में किए जाने वाले संशोधनों का सीधा लाभ मौजूदा अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को मिलना मुश्किल है।

नगर निगम के पास कार्रवाई का अधिकार
टीएंडसीपी के डायरेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के अनुसार, टीएंडसीपी एक्ट और मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। किसी क्षेत्र का ले-आउट स्वीकृत होने के बाद यदि निर्धारित उपयोग के विपरीत गतिविधियां संचालित की जाती हैं तो नियमों के अनुसार कार्रवाई का अधिकार नगर निगम के पास है। जिसके चलते कुछ दिन पहले राजधानी में असर दिखाई दिया था, हालांकि बाद में कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी, जनता ने भी खुलकर विरोध किया था, क्योंकि एक साथ हजारों लोगों के रोजगार पर ताला जड़ दिया गया था, सरकार से मांग की जा रही थी कि वो उनके रोजी-रोजगार पर तीखी निगाह डालने की बजाय समाधान पर जोर दे।

इंदौर को प्रकृतिपूर्ण बनाने की मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कवायद… 21 लाख पौधारोपण अभियान को मिलेगी रफ्तार

इन गतिविधियों पर रहेगी सख्ती
आवासीय क्षेत्रों में पर्यावरण, यातायात और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं

18 मीटर से कम चौड़ी सड़क पर मैरिज या बैंक्वेट हॉल का संचालन।
भारी मशीनरी से जुड़े कारोबार और ऑटोमोबाइल गैरेज।
वेल्डिंग वर्कशॉप तथा ज्वलनशील या रासायनिक पदार्थों का भंडारण।
थोक कारोबार, बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक्स डिपो।
पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के बिना बड़े कोचिंग सेंटर या व्यावसायिक प्रतिष्ठान।

इन गतिविधियों से यातायात का दबाव बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

नियमों के तहत इन गतिविधियों की मिल सकती है अनुमति
हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि आवासीय क्षेत्र में प्रतिबंधित नहीं है। सड़क की चौड़ाई, भूखंड का आकार, पार्किंग व्यवस्था और अन्य निर्धारित मापदंड पूरे होने पर कुछ सीमित कारोबार के लिए नियमानुसार अनुमति प्राप्त की जा सकती है। इनमें किराना, मेडिकल स्टोर, स्टेशनरी, डेयरी, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग और लॉन्ड्री जैसी छोटी दुकानें शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट और आईटी कंसल्टेंट जैसे प्रोफेशनल्स के कार्यालयों को भी निर्धारित नियमों के तहत अनुमति मिल सकती है।

शॉर्टकट अब पड़ सकता है भारी
अधिकारी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग अनुमति और भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को जटिल मानकर उसे पूरा करने के बजाय सीधे अपने मकान या प्लॉट में दुकान अथवा कार्यालय शुरू कर देते हैं। शुरुआत में यह रास्ता आसान दिखाई देता है, लेकिन अब यही लापरवाही उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। यदि किसी व्यक्ति ने व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले नियमानुसार भू-उपयोग परिवर्तन कराया होता और संबंधित अनुमति प्राप्त की होती, तो कारोबार कानूनी दायरे में संचालित किया जा सकता था।

लैंड यूज बदलवाने पर मिल सकती थी कानूनी अनुमति
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विशेषज्ञों के मुताबिक टीएंडसीपी एक्ट की धारा 29 और 30 के प्रावधानों के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर आवासीय क्षेत्र में कुछ परिस्थितियों में व्यावसायिक उपयोग की अनुमति हासिल की जा सकती है। इसके लिए संबंधित भूखंड और सड़क की स्थिति सहित निर्धारित मानकों को पूरा करना जरूरी होता है। समस्या उन मामलों में है, जहां स्वीकृत ले-आउट में जमीन का उपयोग आवासीय निर्धारित होने के बावजूद बिना अनुमति दुकान, कार्यालय, शोरूम या अन्य व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर दी गई। ऐसे मामलों में अब नगर निगम की कार्रवाई का रास्ता खुल गया है और संबंधित प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की तलवार लटक रही है। आने वाले दिनों में नगर निगम की जांच और कार्रवाई से यह साफ होगा कि राजधानी में कितने प्रतिष्ठान वास्तव में वैध अनुमति के साथ संचालित हो रहे हैं और कितने नियमों के विपरीत चल रहे हैं।

MP Weather 8 August 2026: रीवा-सतना-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट, 10 अगस्त के बाद फिर बढ़ेगा मानसून

सम्बंधित ख़बरें

लेटेस्ट