डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीज की सुरक्षा को ताक पर रखने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया था। जहर खुरानी (पॉइजनिंग) के इलाज के दौरान एक मरीज को सामान्य सलाइन की जगह पैक्ड मिनरल वाटर की बोतल से ड्रिप लगा दी गई। मामला मीडिया में उजागर होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को 18 वर्षीय युवक सत्यम यादव को चूहे मारने की दवा खाने के कारण गंभीर हालत में जिला अस्पताल डिंडौरी में भर्ती कराया गया था। मरीज के इलाज के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने स्थापित चिकित्सकीय मानकों और उपचार प्रोटोकॉल को पूरी तरह दरकिनार करते हुए सामान्य सलाइन की जगह पैक्ड मिनरल वाटर की बोतल का उपयोग कर दिया।
जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह कदम बिना किसी वरिष्ठ चिकित्सक की सलाह या अनुमति के उठाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, सलाइन की जगह मिनरल वाटर का सीधा नसों में प्रवेश मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। प्रशासन ने इसे कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना है।
किस पर क्या कार्रवाई हुई
कलेक्टर के कड़े रुख के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर निम्नलिखित प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं:भावना चौहान, नर्सिंग ऑफिसर, को गंभीर लापरवाही के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इनका मुख्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय, डिंडौरी तय किया गया है।
डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय प्रशासकीय निगरानी में चूक के लिए कारण बताओ नोटिस जारी।
डॉ. रमेश मरावी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक अस्पताल प्रबंधन व व्यवस्था में लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी। डॉ. भरत कुमार संत, मेडिकल ऑफिसर इलाज के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी।
नोटिस पाने वाले सभी तीन अधिकारियों को 3 अगस्त 2026 तक अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। समय पर संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ कड़ी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई को अस्पताल में उपचार व्यवस्था, चिकित्सकीय मानकों के कड़ाई से पालन और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इस घटना ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, दवाओं की उपलब्धता और जीवनरक्षक प्रोटोकॉल के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जीवन रक्षक स्थानों पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे संभव हो सकी।
