भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ देशभर में माना जाता है कि ओबीसी समुदाय में किसी भी जाति की सबसे ज्यादा बहुलता है, तो वो यादव समाज है। हिंदी पट्टी में तो इसको साफ देखा सकता है कि उत्तरप्रदेश और बिहार में MY फैक्टर पर चुनाव का सारा फोकस दिखाई देता है, यानि मुस्लिम-यादव जिस तरह निकल गए, सत्ता की गद्दी उनके उतने की करीब आ जाती है। नतीजतन अब बीजेपी ने भी यादव नेतृत्व को मजबूत करने का काम किया है, केंद्रीय नेतृत्व में भूपेंद्र यादव और इसी तरह मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को तो आने वाला बीजेपी की तरफ से यादव समाज को रिझाने वाला सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड माना जा रहा है, इसी का नतीजा है कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें बिहार के यादव बहुल इलाकों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी है।
लालू, अखिलेश के जवाब में ‘मोहन’
देशभर में सबसे ज्यादा लोकसभा (80) और विधानसभा सीट (403) उत्तरप्रदेश में है, इस राज्य में समाजवादी पार्टी की नींव यादव वोटर्स पर टिकी है। सालों से मुलायम सिंह परिवार की राजनीति यादवों पर जाकर टिक जाती है, और उन्होंने ही अपनी विचारधारा के आधार पर सालों से MY फॉर्मूले के जरिए सत्ता पाने का सपना देखा है। इसी फॉर्मूले को नए रुप में PDA के रुप पेश किया गया और मायावती के वोट बैंक को भी अपनी तरफ करने की कोशिश की गई, लेकिन बीजेपी ने भी मध्यप्रदेश की कमान चौथी पंक्ति में बैठे डॉ. मोहन यादव को सौंपकर बाजी पलटने कोशिश की। जिसका असर लालू और अखिलेश के यादव वोटबैंक पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार में रंग जमा रहे सीएम डॉ. मोहन यादव
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए इन दिनों प्रचार अभियान जोरों पर जारी है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी अपने तमाम मुख्यमंत्रियों को वहां स्टार प्रचारक बनाकर पार्टी के समर्थन में प्रचार करने के लिए भेज रही है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यादव बहुल सीटों पर उतारकर लालू, तेजस्वी यादव को मात देने की रणनीति बनाई गई है, क्योंकि जिस तरह से वो प्रचार में जुटे हैं वो भी काफी विशेष है। बात करें पिछले दिनों की तो सीएम डॉ. मोहन यादव ने विक्रम विधानसभा सीट पर पर प्रचार करते हुए कुशल रणनीति के तहत, अपना कनेक्शन स्थानीय स्तर पर बताया, उन्होंने कहा कि इस सीट का नाम विक्रम है और मैं विक्रमादित्य की नगरी से आता हूं, इसलिए जैसे ही मुझे पता चला मुझे यहां आना है, तो मुझे एक अलग आत्मीयता का अनुभव हुआ। जिसे सुनकर सुनकर वहां मौजूद जनता बेहद खुश हुई और जोरदार ताली बजाकर उनका अभिनंदन किया।
देश, उत्तरप्रदेश, बिहार में कितने ‘यादव’
सामाजिक स्तर पर यादव समाज का सटिक आंकड़ा तो मौजूद नहीं है, पर अन्य आंकड़ों के अनुसार भारत की लगभग 142 करोड़ की आबादी को देखते हुए, यादवों की कुल संख्या लगभग 10 से 12 करोड़ के बीच मानी जाती है। जोकि भारत की कुल आबादी का 7% से 9% है। इसी तरह से उत्तर प्रदेश में यादव समाज की आबादी का अनुमान 7% से 9% के बीच है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी लगभग 24 करोड़ है, इसलिए इस हिसाब से यादवों की संख्या लगभग 1.7 करोड़ से 2.16 करोड़ के बीच हो सकती है, जोकि एक बड़ा आंकड़ा है। वहीं बिहार में यादव समाज बहुलता में 14% है जोकि राज्य की कुल आबादी 13.07 करोड़ में 1.82 करोड़ से ज्यादा है।
मध्यप्रदेश में ‘यादव’ आबादी का हिस्सा
सीएम डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने एक बार फिर इसी जाति सिंहासन देकर बड़ा ट्रंप कार्ड खेला, चूंकि इससे पहले उमा भारती के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जिनकी बहू फिलहाल में मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री है, ये दोनों ही नेता यादव समाज से ताल्लुक रखते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के रहने वाले सीएम डॉ. मोहन यादव को प्रदेश का मुखिया बनाकर सूबे की लगभग 12 से 14 प्रतिशत आबादी को साधने का काम किया गया, जोकि जनसंख्या में कुल आबादी 7.26 करोड़ में 80 से 90 लाख है। जिसका असर एमपी की सियासत में आने वाले वक्त में दिखाई देगा, क्योंकि सीएम डॉ. मोहन यादव एक सफल, लोकप्रिय और सुलझे हुए नेता की तरह जनता के सामने नजर आ रहे हैं।


