छिदवाड़ा/तौफीक मिस्कीनी/खबर डिजिटल/ जिले के रजोला गांव में दूषित पानी पीने से बीमार हुए ग्रामीणों के मामले में जिला कलेक्टर ने बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यांत्रिक को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है, और उपयंत्री प्रतीक्षा उईके और सचिव उमेश कुर्सी को निलंबित कर दिया है। जिन पर कार्य में अनियमितता के चलते कार्रवाई को अंजाम दिया गया है।
कलेक्टर हरेंद्र नारायन का एक्शन
छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने बताया कि उनके द्वारा 14 अक्टूबर को रजोल गांव पहुंचकर निरीक्षण किया, और बीमार हुए लोगों का हाल-चाल जाना था। साथ ही अधिकारियों को अस्थाई अस्पताल बनाकर ग्रामीणों को उपचार करने के निर्देश दिए थे, वहीं अब इसमें कलेक्टर का बड़ा एक्शन देखने को मिला है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल नलजल योजना के लिए खनन किए गए नवीन सफल नलकूप को पेयजल वितरण प्रणाली से जोड़ने एवं योजना को क्रियाशील करने का उत्तरदायित्व सहायक यंत्री एन.के.चौधरी तथा उपयंत्री श्रीमती प्रतीक्षा उइके का था, लेकिन उनके द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य को समय पर संपादित नहीं किया गया। इस कृत्य के कारण ग्रामवासियों को कुएं से दूषित जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा,जो बीमारी फैलने का मुख्य कारण बना। जिसके लिए उपयंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उपयंत्री श्रीमती उईके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अधीक्षण यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंडल छिंदवाड़ा रहेगा। साथ ही सहायक यंत्री श्री एन के चौधरी का भी यह कृत्य, पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, कर्तव्यविमुखता एवं शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के प्रति उदासीनता को प्रदर्शित करता है, जो कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम,1965 के नियम-3 के सर्वथा विपरीत है, जिसके लिए सहायक यंत्री श्री चौधरी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है


