भोपाल/ खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर राजधानी भोपाल के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सड़क सुरक्षा उपायों और DDHI पर हुई एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीवन अनमोल है। तेजी में या असावधानीवश सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में उचित नहीं है। दुनिया का कोई भी काम किसी की जिंदगी से बड़ा नहीं होता, इसलिए चाहे जितनी भी जल्दी हो, सड़क पर चलते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना हर नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य है।
हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाना न भूलें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपील की कि सभी लोग दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अवश्य पहनें और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट लगाना कतई न भूलें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सुधरेंगे, तो जग भी सुधरेगा। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना न केवल हमारी जरूरत है, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारी बड़ी जिम्मेदारी भी है। सिविक सेंस कहता है कि वाहन चलाते समय हमें अपने साथ दूसरों के जीवन की सुरक्षा का दायित्व भी समझना चाहिए।
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एडवांस एप्लीकेशन “संजय” का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एक अच्छे वाहन चालक की सच्ची कुशलता तो इस बात में है कि हम सड़क पर अपनी सेंसिबल ड्राइविंग और जिम्मेदारीपूर्ण आचरण से दूसरों को भी प्रेरणा दें। सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक सजगता से ही दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। जन-जागरुकता से समाज में एक सुरक्षित यातायात संस्कृति और इसके लिए जरूरी व्यवस्थाओं का निर्माण किया जा सकता है।
सड़क सुरक्षा के लिए संसाधन उपलब्ध करवाने में हमारी सरकार कभी भी पीछे नहीं हटेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट का बटन दवाकर सड़क सुरक्षा के आधुनिक उपायों पर आधारित एडवांस एप्लीकेशन “संजय” का शुभारंभ किया। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग एवं मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड द्वारा आईआईटी मद्रास और सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ डीडीएचआई और सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर दो अलग एमओयू हस्ताक्षरित कर परस्पर आदान-प्रदान किये गये। इस अवसर मुख्यमंत्री ने आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार की गई ‘सड़क सुरक्षा शिक्षा प्रणाली’ पुस्तक एवं ‘रोड सेफ्टी’ रिपोर्ट का विमोचन भी किया।
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53 प्रतिशत दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से जुड़ी
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी सुधारों के साथ नागरिकों की जागरूकता और जिम्मेदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश में होने वाली लगभग 53 प्रतिशत दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। यदि हेलमेट का सही उपयोग किया जाए तो 60 प्रतिशत जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना केवल नियमों के पालन के लिए नहीं, बल्कि स्वयं की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। मुख्य सचिव श्री जैन ने “जीरो फर्टिलिटी कॉरिडोर” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ सड़क डिज़ाइन, गति नियंत्रण और जनजागरूकता पर ध्यान दिया गया, वहाँ दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा के पांच स्तंभ इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और इंश्योरेंस पर एक साथ काम करना आवश्यक है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा। मुख्य सचिव ने कहा कि भारत सरकार एक नया इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम शुरू कर रही है, जिसके तहत दुर्घटना की सूचना तुरंत अस्पताल तक पहुँचेगी और पहले सात दिनों का इलाज डेढ़ लाख रुपये तक निःशुल्क कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने सभी विभागों और नागरिकों से सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की छोटी-सी सावधानी हजारों जीवन बचा सकती है।
93% दुर्घटना मानवीय त्रुटि से होती हैं
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला सड़क सुरक्षा बढ़ाने और दुर्घटनाएँ कम करने की दिशा में प्रदेश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। “हर मोड़ को सुरक्षित बनाना” इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि जहां 93 प्रतिशत दुर्घटनाएं मानवीय त्रुटि से होती हैं, वहीं 7 प्रतिशत सड़क की ज्यामिति या साइन बोर्ड की कमी से जुड़ी हैं, जिन पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।
सुखवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में 1041 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिन पर लघु अवधि के सुधार कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि दीर्घकालिक उपाय लोक निर्माण विभाग द्वारा 2027 और एमपीआरडीसी द्वारा 2028 तक पूर्ण किए जाएंगे। कार्यशाला में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर, इंदौर और मऊगंज के कलेक्टर और परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जो सड़क सुरक्षा के लिए बहु-विभागीय दृष्टिकोण को सशक्त बनाते हैं।


