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डोर-टू -डोर कचरा संग्रहण में करोड़ों का भ्रष्टाचार, हाईकोर्ट ने सरकार और निगम से मांगा जवाब


डोरटू -डोर कचरा संग्रहण में करोड़ों का भ्रष्टाचार, हाईकोर्ट ने सरकार और निगम से मांगा जवाब
कटनी – नगर निगम कटनी में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण योजना में करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। वरिष्ठ पार्षद और अधिवक्ता मिथलेश जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए म.प्र. शासन, आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग (EOW), नगर निगम कटनी और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने इन सभी विभागों से 04 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

घोटाले के मुख्य आरोप
पार्षद मिथलेश जैन ने अपनी याचिका में ‘रेमकी इनवायरो इंजीनियर प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी और नगर निगम के अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कई गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • फर्जी बिलिंग: आरोप है कि बिना बिल जारी किए ही कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किया गया और बाद में यह राशि जनता के प्रॉपर्टी टैक्स में जोड़कर वसूली गई।
  • नियमों का उल्लंघन: 7 मई 2015 को हुए समझौते के अनुसार, कचरे का सेग्रीगेशन (छंटाई) अनिवार्य था और उसे सीधे कॉम्पैक्टर में डालकर प्लांट ले जाना था, जिसका पालन नहीं किया गया।
  • अवैध डंपिंग: लाखों मीट्रिक टन कचरा उस कृषि भूमि पर डंप कर दिया गया जो प्लांट के लिए आवंटित ही नहीं थी। यह मास्टर प्लान और प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम का खुला उल्लंघन है।
  • वजन में धोखाधड़ी: आरोप है कि कंपनी कचरा ढोने वाले वाहनों में मलबे जैसी भारी सामग्री भरकर वजन बढ़ाती थी ताकि वजन के आधार पर अधिक भुगतान लिया जा सके।
  • तीन गुना भुगतान: रेलवे और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कचरे को भी उसी स्थल पर डंप कर कंपनी द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से तीन गुना भुगतान लिया जा रहा है।

FIR की मांग
याचिकाकर्ता ने बताया कि वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद न तो कोई प्रारंभिक जांच पूरी हुई और न ही एफ.आई.आर. दर्ज की गई। अब हाईकोर्ट में रिट अपील दाखिल कर नगर निगम अधिकारियों, रेमकी इनवायरो कंपनी के निर्देशकों और प्लांट प्रभारी के खिलाफ आर्थिक अनियमितता, पर्यावरण उल्लंघन और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में एफ.आई.आर. दर्ज करने की मांग की गई है।

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