छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन कृषि मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना शुरू की है. इस योजना के तहत ऐसे परिवारों को हर साल 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. इसका उद्देश्य उन लोगों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी आजीविका पूरी तरह कृषि मजदूरी पर निर्भर है और जिनके नाम पर कोई खेती योग्य जमीन नहीं है. यह योजना ग्रामीण गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
ऑफ सीजन में मिलेगी आर्थिक राहत
ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे मजदूर हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और वे केवल खेतों में मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं. खेती का काम मौसम पर निर्भर होने के कारण कई महीनों तक उन्हें रोजगार नहीं मिल पाता. ऐसे समय में परिवार आर्थिक संकट का सामना करता है. इसी परेशानी को कम करने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से इस योजना की शुरुआत की. योजना का मकसद भूमिहीन मजदूर परिवारों की वार्षिक आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना है.
डीबीटी के जरिए सीधे खाते में पहुंचती है राशि
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पात्र परिवारों को हर वर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहती है और किसी भी प्रकार के बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है. सरकार का मानना है कि इस आर्थिक मदद से मजदूर परिवारों को जरूरत के समय साहूकारों से महंगा कर्ज लेने की मजबूरी नहीं होगी और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर बनेगी.
लाखों परिवारों को मिला योजना का लाभ
योजना के पहले वर्ष 2025 में 5 लाख 62 हजार 112 पात्र हितग्राहियों को 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई थी. वहीं वर्ष 2026 में 4 लाख 95 हजार 965 परिवारों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये भेजे जा रहे हैं. इस सूची में 22 हजार 28 बैगा-गुनिया परिवार भी शामिल हैं. आने वाले समय में भुगतान में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पात्र हितग्राहियों का भौतिक सत्यापन और ई-केवाईसी का काम भी तेजी से कराया जा रहा है.
आवेदन के लिए जरूरी पात्रता और प्रक्रिया
इस योजना का लाभ केवल ग्रामीण क्षेत्र के उन परिवारों को मिलेगा, जिनके नाम पर कोई कृषि भूमि दर्ज नहीं है और जिनकी आय का मुख्य स्रोत कृषि मजदूरी है. आवेदन करने के लिए इच्छुक परिवार पंचायत, जनपद या विकासखंड कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त कर उसे जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा कर सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है. आवेदन के साथ आधार कार्ड, डीबीटी से जुड़ा बैंक खाता, मोबाइल नंबर, ग्राम पंचायत का सत्यापन पत्र और पटवारी द्वारा जारी भूमिहीन प्रमाण पत्र देना आवश्यक है. सभी दस्तावेज सही पाए जाने के बाद पात्र हितग्राही को योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाता है.
