Monday, November 2, 2026
Homeमध्यप्रदेशDindori Hospital: 19 घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए शव रखा फिर किया...

Dindori Hospital: 19 घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए शव रखा फिर किया इनकार, परेशान होते रहे परिजन

डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव / डिंडोरी जिला अस्पताल से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। कचनारी के जंगलों से दो टुकड़ों में बरामद महिला के शव के पोस्टमॉर्टम को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने भारी लापरवाही दिखाई। शव को अस्पताल में करीब 19 घंटे तक बिना किसी कार्रवाई के रखा गया और बाद में तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। अस्पताल की इस संवेदनहीनता के कारण मृतिका के परिजनों और पुलिस को भारी मानसिक व व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
​
​घटना की पृष्ठभूमि के अनुसार, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कचनारी की रहने वाली 46 वर्षीय महिला देववती, पति चरण सिंह मरावी, बीते 23 जून को अपने पति के साथ जंगल में लकड़ी लेने गई थी। उसके बाद से ही वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। लापता होने के सातवें दिन, यानी मंगलवार की सुबह, जंगल में बकरी चराने गए एक ग्रामीण ने महिला का शव देखा और अन्य ग्रामीणों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया।

​मौके पर पहुँचने पर पुलिस को महिला का शव बेहद क्षत-विक्षत और संदिग्ध अवस्था में मिला। महिला का सिर एक पेड़ पर लटका हुआ था, जबकि उसका धड़ उससे कुछ दूरी पर जमीन पर पड़ा हुआ था।
​
​पुलिस ने घटनास्थल पर प्रारंभिक कार्रवाई पूरी करने के बाद मंगलवार की शाम को ही शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल पहुँचा दिया था। जिला सिविल सर्जन ने इसके लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम भी गठित कर दी थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मंगलवार रात से लेकर बुधवार की दोपहर तक शव अस्पताल में ही पड़ा रहा।

​बुधवार दोपहर को अचानक डॉक्टरों ने ‘तकनीकी कारणों’ का हवाला देते हुए पोस्टमॉर्टम करने से साफ इनकार कर दिया और पुलिस व परिजनों को शव को जबलपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने का तुगलकी फरमान सुना दिया।

​परिजनों में भारी आक्रोश, व्यवस्था पर उठे सवाल

​अस्पताल प्रबंधन के इस टालमटोल वाले रवैये और संवेदनहीनता को देखकर मृतिका के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने डॉक्टरों की इस हीलाहवाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। वहीं, अचानक जबलपुर ले जाने के आदेश के कारण पुलिस प्रशासन को भी आनन-फानन में शव वाहन और अन्य व्यवस्थाएं जुटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। इस पूरी घटना ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लेटेस्ट