MLA Nirmala Sapre: बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनकी विधायकी रद्द करने की मांग की है। आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान सप्रे ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का साथ दिया, जो दलबदल कानून का उल्लंघन है। फिलहाल, मामले की सुनवाई जारी है।
हाईकोर्ट में गूंजा दलबदल मामला
बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में अब नया मोड़ आ गया है। यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और अब इसकी गूंज हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कई अहम बिंदु सामने आए। याचिका में उमंग सिंघार ने मांग की है कि बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को शून्य घोषित किया जाए। उनका आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था, जो दलबदल कानून के तहत नियमों का उल्लंघन है। इस आधार पर उनकी विधायकी खत्म करने की मांग की गई है।
निर्मला सप्रे का दावा, ‘कांग्रेस में हूं‘
वहीं, इस मामले में निर्मला सप्रे ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए साफ तौर पर कहा कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं। उन्होंने दलबदल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
सिंघार को कोर्ट ने दिया समय
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को दलबदल से जुड़े पुख्ता सबूत पेश करने का समय दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाण पेश किए जाएं, जिससे यह साफ हो सके कि वास्तव में दलबदल हुआ है या नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की है।


