भोपाल/खबर डिजिटल। मध्यप्रदेश के CM Mohan Yadav ने 4 जून को उच्च शिक्षा विभाग MP Higher Education के कार्यों की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की तर्ज पर राज्य परिषद अर्थात SAAC के गठन की कार्यवाही प्रारंभ की जाए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों पर फोकस किया जाए। आने वाला वर्ष युवा वर्ष होगा, इस नाते अन्य संबंधित विभागों के साथ विद्यार्थियों के हित में नए कार्यक्रमों और प्रकल्पों को लागू करने की तैयारी भी की जाए।
CM Mohan Yadav ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में निरंतर सुधार के कदम उठाए जाएं। पीएम श्री महाविद्यालयों में भी इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। अन्य सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सुचारू संचालन होता रहे, इस पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए पाठ्यक्रमों को प्रारंभ करने की दिशा में हुए कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में इंदौर, उज्जैन और चित्रकूट में तीन वर्षीय विमानन पाठ्यक्रम बीबीए प्रारंभ किया गया है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। प्रदेश में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। गत वर्ष 83 नए शोध केंद्र प्रारंभ किए गए। आने वाले समय में 100 शोध केंद्र स्थापित होंगे। सकल नामंकन अनुपात (जीईआर) में प्रदेश ने भारत के 1.1 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले 1.8 की वृद्धि करने में सफलता प्राप्त की है।
इसी तरह गत ढाई वर्ष में नेशनल लॉ इन्स्टिट्यूट यूनिवर्सिटी में 27वीं और डीएवीवी इंदौर ने 49वीं रैंक प्राप्त की है। प्रदेश की तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को भी नेशनल इन्स्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेम वर्क (एनआईआर एफ) द्वारा श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के लिए सराहा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिन्दवाड़ा के राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में अच्छे विषयों का समावेश करें। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक आर्थिक सहयोग देगी। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण,आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान के कोर्स के लिए व्यवस्था की जाए। विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश
• महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में रोजगार परक पाठ्यक्रम के संचालन पर जोर हो।
• पार्ट टाइम महाविद्यालय संचालित किए जाएं। प्रातः और शाम की शिफ्ट में कॉलेज चलाए जा सकते हैं।
• आवश्यकता के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों के भवन में भी महाविद्यालय संचालित करें।
• कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को काउंसलिंग की भी व्यवस्था हो।
• खाद्य प्रसंस्करण,आर्किटेक्चर और कृषि विज्ञान सहित अन्य वोकेशनल विषयों के अध्ययन के लिए महाविद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की जाए।
