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Friday, April 17, 2026
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खाद की बोरियां गिरने से मजदूर की दर्दनाक मौत.. सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल

कंपनी के जिम्मेदारों की लापरवाही

झाबुआ/सुनील डाबी/खबर डिजिटल/ औद्योगिक क्षेत्र मेघनगर स्थित एग्रोफॉस इंडिया लिमिटेड खाद फैक्ट्री में रविवार को हुआ दर्दनाक हादसा एक बार फिर यह सवाल उठा रहा है — क्या मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? फैक्ट्री में खाद से भरी बोरियों की ऊंची थप्पी अचानक भरभराकर गिर पड़ी, जिससे मजदूर सुनील पिता रमेश बारदेव (निवासी केलूपाड़ा, थाना सातरुंडा, जिला रतलाम) की मौके पर ही मौत हो गई।

भयावह दृश्य: बोरियों के नीचे दबे रह गया मजदूर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना तेज और भयानक था कि सुनील को संभलने का मौका तक नहीं मिला। साथी मजदूरों ने किसी तरह बोरियों को हटाकर उसे बाहर निकाला, लेकिन कंपनी की लापरवाही यहीं भी झलक गई। एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। मजदूरों ने घायल साथी को मोटरसाइकिल पर अस्पताल पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मजदूरों का आरोप – “कंपनी के जिम्मेदार हादसे के बाद भी नहीं पहुँचे”
हादसे के बाद गुस्साए मजदूरों ने आरोप लगाया कि कंपनी का कोई अधिकारी अस्पताल नहीं पहुंचा। मजदूरों के मुताबिक उन्हें न तो हेलमेट, न सेफ्टी बेल्ट, न ही सुरक्षा जूते मुहैया कराए जाते हैं। एक श्रमिक ने कहा “अगर सुनील को सेफ्टी गियर मिला होता तो शायद आज वो जिंदा होता। हम रोज जान हथेली पर रखकर काम करते हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा किसी की प्राथमिकता नहीं।”

प्रबंधन का दावा – “परिवार को दी आर्थिक सहायता”
कंपनी प्रबंधन ने बयान जारी कर बताया कि मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है तथा अंतिम संस्कार के लिए भी मदद दी गई है। मेघनगर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव परिजनों को सौंप दिया है।

सवालों के घेरे में निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था
यह हादसा सिर्फ एक फैक्ट्री की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र मेघनगर की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है। अधिकांश फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता और न ही मजदूरों का विधिवत पंजीयन होता है।

अब यह सवाल उठना लाजिमी है
क्या संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर रहे हैं?
क्या श्रम विभाग की निगरानी सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?
और आखिर कब तक मजदूरों की जिंदगी ऐसे हादसों की कीमत चुकाती रहेगी?

मजदूरों की आवाज उठाना जरूरी
सुनील की मौत केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि हर उस श्रमिक की पीड़ा की प्रतीक है जो रोज़ाना अपनी रोटी के लिए खतरे में काम करता है। जरूरत है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे, सभी फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य कराए, और मजदूरों को सम्मानजनक व सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान किया जाए।यह हादसा चेतावनी है — अगर अब भी नहीं जागे, तो अगला सुनील कौन होगा, कोई नहीं जानता।

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