P?c1=2&c2=41463588&cv=3.9
Friday, April 17, 2026
No menu items!
spot_img
Homeमध्यप्रदेशआलीराजपुर: कट्ठीवाड़ा में आदिवासी परंपरा का जीवंत उत्सव: ग्राम जबानियां में श्रद्धा...

आलीराजपुर: कट्ठीवाड़ा में आदिवासी परंपरा का जीवंत उत्सव: ग्राम जबानियां में श्रद्धा से हुआ डालू (ईदल देवता) पूजन

कट्ठीवाड़ा डालू पूजन

आलीराजपुर/ कुलदीप खराड़ीया/ खबर डिजिटल/ आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में आदिवासी समाज की प्राचीन आस्था और परंपरा का प्रतीक पीढ़ी बदलना या डालू पूजन, जिसे स्थानीय लोग ईदल देवता या ईद देवता के नाम से भी जानते हैं, आज ग्राम जबानियां में पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
इस विशेष अवसर पर मिट्टी से निर्मित घोड़ों की स्थापना की गई, जो डालू देवता के प्रतीक माने जाते हैं। घोड़े के समीप क्षेत्र में उगाई जाने वाली विभिन्न फसलों — मक्का, ज्वार, धान, बाजार सहित अनेक प्रकार के अनाज अर्पित किए गए। यह परंपरा आदिवासी समाज के प्रकृति-पूजन और कृषि से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।
पूजन कार्यक्रम में बढ़वा/भुवा (जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है) द्वारा पारंपरिक विधि से पूजा कराई गई। मान्यता के अनुसार, डालू पूजन की सुबह बकरे की बलि देकर बाबादेव से क्षेत्र की खुशहाली, अच्छी फसल और समाज की रक्षा की कामना की जाती है।
पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र के लोग पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आए। ढोल-मांदल की थाप, पारंपरिक गीत-संगीत और सामूहिक सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि डालू पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, एकता और विरासत का जीवंत प्रतीक है।
कट्ठीवाड़ा अंचल में पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही है, जो आदिवासी समाज की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करती है।

सम्बंधित ख़बरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

लेटेस्ट