खबर digital News रिपोर्टर /कटनी— नगर निगम कटनी के बाहर सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ और संयुक्त सफाई कर्मचारी मोर्चा ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक काम पर वापसी नहीं होगी।हड़ताल में विनियमित, नियमित, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल होने का दावा किया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि राज्य शासन और नगर निगम ने लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, जिसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।कर्मचारी संगठनों द्वारा नगर निगम आयुक्त को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि डिप्टी कमिश्नर के साथ हुई वार्ता पूरी तरह विफल रही और कर्मचारी उससे संतुष्ट नहीं हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि हड़ताल के कारण शहर में सफाई व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और जिला प्रशासन की होगी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कटनी शहर को कचरे के ढेर में तब्दील होने दिया जाएगा? क्या नगर निगम के पास सफाई व्यवस्था बनाए रखने की कोई वैकल्पिक योजना है, या लाखों नागरिकों को गंदगी, दुर्गंध और संभावित बीमारियों के बीच रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर कर्मचारियों की मांगों पर अब तक निर्णायक पहल क्यों नहीं हुई? यदि बातचीत से समाधान निकल सकता था, तो मामला अनिश्चितकालीन हड़ताल तक क्यों पहुंचा? शहर की जनता यह जानना चाहती है कि इस टकराव का अंत कब होगा और इसकी कीमत आखिर आम नागरिक क्यों चुकाएं?यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो कटनी में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा सकती है और इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य, पर्यावरण और शहर की व्यवस्था पर पड़ सकता है।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट
