मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं. मंगलवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई, लेकिन इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और अजय सिंह बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे संगठन के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को और बल मिला.
कई राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा
बैठक के दौरान प्रदेश से जुड़े कई राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. इनमें वीर भारत न्यास से जुड़ा विवाद भी प्रमुख रहा. हाल के दिनों में इस मुद्दे को लेकर दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच सामने आए मतभेदों पर भी विचार किया गया. पार्टी के भीतर इस विवाद को लेकर अलग-अलग राय सामने आने के बाद इसे गंभीरता से बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद का असर पार्टी की छवि और जनता के बीच उसके संदेश पर पड़ सकता है. जमीन से जुड़े मामले में लंबी बातचीत के बाद यह सहमति बनी कि आगे की रणनीति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तय की जाएगी. इसी आधार पर आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया.
राम मंदिर चोरी पर चर्चा
बैठक में राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस की आगामी रणनीति पर चर्चा हुई. पार्टी नेताओं ने इस विषय पर विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की और इसे जनता के बीच उठाने की योजना बनाई. फिलहाल, वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति और संगठन के भीतर जारी मतभेदों ने एक बार फिर मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
