मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत सचिवों की नियुक्ति और स्थानांतरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नई गाइडलाइन जारी की है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत अब पंचायत सचिवों की तैनाती को लेकर कई नए नियम लागू किए गए हैं. सरकार का उद्देश्य पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना और हितों के टकराव की स्थिति को खत्म करना बताया जा रहा है. नए नियमों के अनुसार कोई भी पंचायत सचिव अब अपने गृहग्राम की पंचायत में कार्य नहीं कर सकेगा. इसके अलावा ससुराल वाले गांव की पंचायत में भी उसकी पदस्थापना नहीं की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहेगी और स्थानीय स्तर पर पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी.
रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच होने पर भी होगा तबादला
नई गाइडलाइन में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है. यदि किसी पंचायत में सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच के पद पर निर्वाचित हो जाते हैं, तो संबंधित सचिव को वहां से हटाकर किसी अन्य पंचायत में भेज दिया जाएगा. इस नियम का उद्देश्य पंचायतों में पारिवारिक प्रभाव को कम करना और प्रशासनिक कार्यों को निष्पक्ष तरीके से संचालित करना है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत सचिव की नियुक्ति केवल ऐसी पंचायत में की जाएगी जहां उसका कोई प्रत्यक्ष पारिवारिक हित न जुड़ा हो. यानी न तो वह पंचायत उसका गृहग्राम हो, न ससुराल और न ही वहां उसके करीबी रिश्तेदार पंचायत के महत्वपूर्ण पदों पर हों.
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं. विभाग ने कहा है कि नई व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर लागू किया जाए और स्थानांतरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो. यह आदेश 9 जून को जारी किए गए हैं. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 15 जून तक स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं चाहती और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दे रही है.
ऐसे जारी होंगे स्थानांतरण आदेश
नई व्यवस्था के तहत पंचायत सचिवों के स्थानांतरण आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे. अब एक ही जिले के भीतर विभिन्न पंचायतों में सचिवों का तबादला किया जा सकेगा. हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी प्रशासनिक स्वीकृतियां भी अनिवार्य की गई हैं. किसी भी स्थानांतरण प्रस्ताव को लागू करने से पहले संबंधित जिला कलेक्टर और जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी लेना जरूरी होगा. विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया एक जून से प्रभावी मानी जाएगी. गौरतलब है कि वर्तमान में मध्य प्रदेश में 23 हजार से अधिक पंचायत सचिव कार्यरत हैं. ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ने वाला है और आने वाले दिनों में कई पंचायत सचिवों के तबादले देखने को मिल सकते हैं.
