Monday, November 2, 2026
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MP DGP कैलाश मकवाना पर हाईकोर्ट सख्त… 17 लाख की रिकवरी लौटाने के निर्देश

रिटायर पुलिस अधिकारी की याचिका पर सुनवाई

जबलपुर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस विभाग की एक सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर से की गई करीब 17 लाख रुपये की रिकवरी की राशि वापस नहीं किए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने अधिकारियों को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी राशि सेवानिवृत्त महिला अधिकारी को लौटाई जाए। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में डीजीपी कैलाश मकवाना समेत संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।

सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर ने लगाई थी याचिका
मामले की सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम की याचिका पर हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से करीब 17 लाख रुपये की रिकवरी को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए डीजीपी कैलाश मकवाना सहित तीन अधिकारियों के रवैए पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने उन्हें राशि लौटाने के लिए अंतिम अवसर प्रदान करते हुए चार सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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आदेश का पालन नहीं हुआ तो 28 सितंबर को पेशी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि तय अवधि में सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर की राशि वापस नहीं की गई, तो डीजीपी कैलाश मकवाना, तत्कालीन भोपाल एसपी ममतेश माली और पेंशन अधिकारी शोभा भाकरिया को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के लिए यह सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कोर्ट ने आदेश के पालन पर दिया जोर
हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को अदालत के आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालांकि, व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश को किसी दंडात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि अदालत मामले में जारी अपने आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर है।अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चार सप्ताह की अवधि के भीतर संबंधित महिला अधिकारी को पूरी राशि लौटाई जाती है या फिर डीजीपी समेत अन्य अधिकारियों को 28 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ता है।

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