डेस्क। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुरखी विधानसभा से बीजेपी विधायक और मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति से जुड़ी गलत जानकारी दी और कुछ फैक्ट्स की जानकारी छिपाई. हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में सीधे रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों के लिए कानून में चुनाव याचिका का प्रावधान है।
कांग्रेस प्रत्याशी ने दायर की थी याचिका
यह याचिका सुरखी विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नीरज शर्मा और राजकुमार सिंह की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करते समय गोविंद सिंह ने अपने चुनावी हलफनामे में चल और अचल संपत्ति की पूरी और सही जानकारी नहीं दी।
चुनाव आयोग से कार्रवाई और केस दर्ज करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग और रिटर्निंग अधिकारी के सामने भी शिकायत की थी। उन्होंने मांग की थी कि उनके आवेदन पर कार्रवाई की जाए और गोविंद सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं।
हाईकोर्ट ने कहा- चुनावी विवाद का अलग कानूनी रास्ता है
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। प्रतिवादियों की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 और 81 के अनुसार चुनाव परिणाम को चुनौती देने का वैधानिक माध्यम चुनाव याचिका है, न कि रिट याचिका।
कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब कानून में चुनाव संबंधी विवाद के समाधान के लिए अलग व्यवस्था मौजूद है, तब चुनाव आयोग को रिट याचिका के माध्यम से कार्रवाई करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए विजेता घोषित होने के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का प्रावधान है। इसी आधार पर दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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