मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी तीनों सीटों पर जीत सुनिश्चित कर ली है, जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है. जीत के बाद बीजेपी खेमे में जश्न शुरू हो चुका है और इसे संगठन की बड़ी सफलता के रूप में पेश किया जा रहा है. दूसरी तरफ कांग्रेस अभी भी उम्मीद नहीं छोड़े हुए है और उसकी नजर अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है. कांग्रेस का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं हुई है. कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्य की तीसरी सीट पर महेश केवट को अभी भी झटका लग सकता है. पार्टी को भरोसा है कि अदालत से राहत मिलने की स्थिति में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. इसी उम्मीद के साथ कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
कांग्रेस की ओर से जल्द सुनवाई की मांग
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया जाएगा. कांग्रेस की ओर से जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी ताकि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले अदालत इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट कर सके. चूंकि राज्यसभा चुनाव 18 जून को प्रस्तावित हैं, इसलिए पार्टी चाहती है कि मामले पर तत्काल सुनवाई हो और समय रहते फैसला सामने आए. हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह कानूनी लड़ाई आसान नहीं होगी. कई नेताओं और विश्लेषकों का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन को अदालत से राहत मिलने की संभावना सीमित दिखाई देती है. इसके अलावा कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान एक वैकल्पिक या डमी उम्मीदवार नहीं उतारना बड़ी चूक साबित हुई. पहले ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए बैकअप उम्मीदवार रखने की परंपरा रही है.
सुप्रीम कोर्ट पर नजर
अब पूरे मामले का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करता है. यदि अदालत कांग्रेस के पक्ष में कोई राहत देती है, तो राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट पर मुकाबला दोबारा रोचक हो सकता है. इससे चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक समीकरण दोनों प्रभावित हो सकते हैं. वहीं यदि अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो जाएगी और उसकी घोषित जीत पर किसी तरह का कानूनी या राजनीतिक असर नहीं पड़ेगा. फिलहाल कांग्रेस की आखिरी उम्मीद न्यायपालिका से जुड़े फैसले पर टिकी हुई है, जबकि बीजेपी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है.
