भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरे से कांग्रेस के नेता काफी उत्साहित हैं, हालांकि मौका दुख का है, कि इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पानी से 20 से ज्यादा मौतें हो गईं। इसी का नतीजा है कि उनकी आवाज उठाने के नाम पर राहुल गांधी को इंदौर का रुख करना पड़ा। पर इससे भागीरथपुरा के लोगों को कितना लाभ मिल पाएगा, या कहें कि जिन लोगों के घरों में मौतें हुई है, उनका दुख कितना कम पाएगा, ये अगले वक्त की बात है, क्योंकि जिनके घर का चिराग महज पानी पीने से ही बुझ गया, वो सिर्फ यह कह रहे हैं कि इस कांड के दोषियों को कुछ तो सजा मिलनी चाहिए, ताकि आने वाले वक्त में एक नजीर साबित हो।
राहुल का दौरा मध्यप्रदेश के लिए कितना खास
राहुल गांधी के इंदौर आने से सियासी रुख क्या होगा, इसको लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है, क्योंकि वे स्थानीय नेताओं से चर्चा करके गए हैं, जिसकी रणनीति वो अपने साथ ही बनाकर लाए थे, ताकि भागीरथपुरा जैसी त्रासदी के बाद जनता तक कांग्रेस की बात पहुंचे, और जनता भी कांग्रेस को सीरियस लेते हुए सत्ता के गलियारों की तरफ मोड़ दे। राहुल गांधी के दौरे में सबसे खास बात यह भी रखी गई थी कि वो मध्यप्रदेश तो आ रहे हैं लेकिन प्रदेशभर के जिला अध्यक्षों को ब्लॉक स्तर पर भागीरथपुरा की घटना पर विरोध जाहिर करने का करने का फरमान दिया गया था, जोकि दर्शाता है कि अबकी बार राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस कुछ तो पलटवार की स्थिति बनाने के मूड में आए थे।
इसका भी ध्यान रखना राहुल जी?
मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की आमद के बाद कांग्रेस की परिस्थिति क्या होगी, ये आने वाले वक्त में छिपा है, लेकिन उन्हें स्थानीय स्तर की कांग्रेस की उन चुनौतियों को भी समझना होगा जोकि इस प्रकार है…
स्थानीय गुटबाजी को खत्म करने का निकालना होगा रास्ता…
किसी भी आंदोलन को संघ, बीजेपी की तरह बनाना होगा मुहिम…
लाड़ली बहना योजना का निकालना होगा कोई तोड़…
बीजेपी की गुटबाजी का फायदा लेने का बनाना होगा प्लान…
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अभी करना होगी भूमिका तय…
टिकट वितरण को लेकर भी अभी से करना होगी तैयारी…
नगरीय निकाय चुनाव पर भी अभी देना होगा ध्यान…
क्योंकि नगरीय निकाय चुनाव ही होगा अगले चुनाव का ट्रेलर…
कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन राहुल का दौरा?
वीओ – मध्यप्रदेश की इसी सियासी पृष्ठभूमि को समझकर ही राहुल गांधी का दौरा कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन साबित हो सकता है, वरना हर बार की तरह, इस बार भी संघ के हिंदू सम्मेलनों और बीजेपी के संगठनात्मक ढ़ांचे के सामने कांग्रेस को बौना साबित होना पड़ेगा।


