रीवा/ अरविन्द तिवारी/ खबर डिजिटल / त्योंथर तहशील अंतर्गत में अन्नदाता किसान इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रहे हैं। खेतों में रोपाई के बाद खाद डालने का समय है, लेकिन खाद की किल्लत ने हालात बिगाड़ दिए हैं। सरकारी सोसायटियों में खाद का स्टॉक नदारद है, जबकि बाज़ार में वही खाद खुलेआम दोगुने-तीगुने दामों पर बिक रही है। शासन के दावे और किसानों के हक़ में बनाई गई योजनाएं इस हकीकत के आगे खोखली साबित हो रही हैं। किसानों का आरोप है कि सुबह से लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद भी उन्हें केवल एक य दो बोरी मिलती है या जवाब मिलता है – खाद खत्म हो गई।
दुकानों पर न स्टॉक बोर्ड, न रेट सूची, और न ही प्रशासन की कोई सख्त कार्रवाई। FCI केंद्र पर धक्का-मुक्की
किसानों का कहना है कि खाद का बड़ा हिस्सा व्यापारी उठा लेते हैं और कालाबाज़ार में बेचते हैं, जबकि असली जरूरतमंद किसान खाली हाथ लौटते हैं। कई किसानों ने मांग की है कि अगर त्यौंथर में खाद की कमी है तो उसका जिम्मेदार यहां का प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि है, किसानो ने कहा कि अगर खाद की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो अनशन प्रदर्शन किया जाएगा।
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