आलीराजपुर/ कुलदीप खराड़िया/ खबर डिजिटल/ आजाद नगर (भाबरा) जनपद पंचायत में RTI के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी समाजसेवी दिनेश निनामा, रमेश मोहनिया और सुरेश वसुनिया ने पंचायतों में हुए विकास कार्यों और कैश बुक की प्रतिलिपि मांगी थी।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंदर सिंह पटेल ने 34 पंचायतों के निर्माण कार्यों की जानकारी दी, लेकिन कैश बुक की मांग को ठुकरा दिया। आश्चर्य की बात यह रही कि आवेदक BPL श्रेणी में होने के बावजूद उनसे निर्धारित शुल्क भी वसूला गया, जो नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।
अधिकारियों का पल्ला झाड़ना, नाराजगी बढ़ी
जब कैश बुक की मांग की गई, अधिकारियों ने कहा कि यह जानकारी उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती और जिला स्तर से पूछताछ की जाएगी। इस जवाब से आदिवासी समाज में संदेह और आक्रोश बढ़ गया।
कागजों में करोड़ों, जमीन पर सन्नाटा
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के बाद कई पंचायतों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य दिखाए गए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नजर नहीं आता। न गुणवत्ता है और न पारदर्शिता।
आदिवासी समाज का कहना है कि जानकारी छुपाना भ्रष्टाचार का संकेत है। RTI के तहत जानकारी देना अनिवार्य है, फिर भी टालमटोल की जा रही है।
आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कैश बुक की प्रतिलिपि नहीं मिली, तो 34 पंचायतों के 54 गांवों के लोग सुबह 10:30 बजे जनपद पंचायत परिसर में सामूहिक निवेदन देंगे। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिली तो आमरण अनशन किया जाएगा।
आंदोलन के प्रमुख नेता
पप्पू वसुनिया, चंदू डामोर, राजू डामोर, रमेश मोहनिया, रमेश मीणा, बाजू डामोर, शेर सिंह डावर, शैतान सिंगाड़ सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग आंदोलन में शामिल होंगे।


