MP News: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने हाल ही में प्रदेश के सभी विधायकों को बड़ा झटका दिया है। सरकार ने विधायकों के वेतन और भत्तों को बढ़ाने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह फैसला प्रदेश की आर्थिक हालात और बढ़ते वित्तीय दबाव के चलते लिया है।
विधायकों ने की थी मांग
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों दलों के विधायक बढ़ते खर्चों का हवाला देते हुए वेतन-भत्तों में वृद्धि की मांग कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एक समिति गठित की थी, जिसकी जिम्मेदारी प्रस्ताव तैयार करना और अन्य राज्यों से तुलना करना था।
देवड़ा को सौंपी थी जिम्मेदारी
गठित की गई समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को सौंपी गई थी, जबकि इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। समिति ने एक रिपोर्ट भी तैयार की जिसमें सामने आया कि गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जनप्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश की तुलना में अधिक वेतन-भत्ते मिल रहे हैं।
प्रस्ताव किया निरस्त
राज्य पर बढ़ते कर्ज और वित्तीय बोझ को देखते हुए सरकार ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया है। वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी और अन्य योजनाओं पर खर्च को प्राथमिकता देने के कारण यह निर्णय लिया गया है। बता दें कि लगभग एक दशक से जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों में वृद्धि नहीं हुई है। सरकार के इस फैसले के बाद से सत्ता और विपक्ष के विधायक असंतोष जताते नजर आ रहे हैं। हालांकि अबतक किसी भी विधायक का सार्वजनिक रूप से बयान सामने नही आया है।


