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श्योपुर के हॉस्टल का शर्मनाक वीडियो, गणतंत्र दिवस के मौके पर छात्र लगा रहे झाडू और बना रहे हॉस्टल में चाय, कलम की जगह बच्चों के हाथ में थमाए झाडू

श्योपुर हॉस्टल में गणतंत्र दिवस पर छात्रों से झाड़ू लगवाई

श्योपुर/ धीरज बालोठिया/ खबर डिजिटल/ जिले के कराहल विकासखंड के इंग्लिश छात्रावास का एक वीडियो सोशल मीडिया वायरल हुआ है.जिसमें बच्चों को पढ़ाई की जगह झाड़ू लगवाते और चाय बनाते देखा गया है. अभिभावक इसे शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बता रहे है.वीडियो वायरल होने के बाद जिले के कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया है.वीडियो सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग की कर प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

श्योपुर जिले के कराहल इंग्लिश छात्रावास से शिक्षा की लापरवाही उजागर करने बाली और चौंकाने बाली वीडियो अब सोशल मीडिया जमकर वायरल हो रही है. कराहल के इंग्लिश हॉस्टल में बच्चों को पढ़ाई कराने की बजाए उनके हाथों में झाड़ू थमा दिए गए इतना नहीं बच्चे हॉस्टल की किचिन में चाय बनाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह वीडियो 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का है. वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने अभी तक किसी भी प्रकार का कोई संज्ञान नहीं लिया है। वीडियो में छात्र देखा जा सकता है किस तरह से छात्र हाथों में झाड़ू लेकर हॉस्टल परिसर में झाड़ू लगाते और किचिन में चाय बनाते दिखाई दे रहे है.

बच्चों के हाथ में झाड़ू और किचिन की जिम्मेदारी

गणतंत्र दिवस के मौके पर जिले की इंग्लिश छात्रावास में बच्चों द्वारा झाड़ू और किचन में चाय बनाने का वीडियो वायरल हुआ है. क्या शिक्षा विभाग की यही जिम्मेदारी है.क्या उक्त छात्रावास में रसोइया और सफाई कर्मी नहीं है. अगर सफाई कर्मी और रसोईयां बहा पर तैनात था. तो फिर बच्चों के हाथ में झाड़ू और किचिन की जिम्मेदारी क्यों दी गई.क्या अधीक्षक द्वारा इस मामले में कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया.अधीक्षक ने इस मामले पर अबतक क्यों चुप्पी साध रखी है.अधीक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई विभाग ने क्यों नहीं की.

हटाए गए अधीक्षक को महज 15 दिन में फिर सौंपा प्रभार

कराहल स्थित शासकीय आदिवासी अंग्रेजी माध्यम बालक आश्रम एक बार फिर प्रशासनिक अस्थिरता और अफसरशाही की उलझनों का शिकार बनता नजर आ रहा है। इस बार सवाल सीधे जिला कलेक्टर के निर्णयों पर उठ रहे हैं, जहां एक ही पखवाड़े में अधीक्षक बदलने का आदेश जारी हुआ और फिर उसी आदेश को पलटते हुए पुराने अधीक्षक को दोबारा प्रभार सौंप दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 दिसंबर 2025 को कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा कार्यालयीन आदेश क्रमांक आजाक /स्था/2025/5417 जारी किया गया। आदेश में ‘प्रशासकीय कार्य सुविधा की दृष्टि से’ शासकीय आदिवासी अंग्रेजी बालक आश्रम कराहल का अधीक्षकीय प्रभार अरुण कुमार श्रीवास, प्राथमिक शिक्षक को आगामी आदेश तक सौंपा गया। साथ ही तत्कालीन अधीक्षक राजू सेमरिया को उनकी मूल पदस्थापना शासकीय प्राथमिक विद्यालय बाढ़ के लिए कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए गए और आदेश को तत्काल प्रभावशील बताया गया। हैरानी की बात यह रही कि कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद नवनियुक्त अधीक्षक अरुण श्रीवास को प्रभार तक ग्रहण नहीं करने दिया गया, और महज 15 दिन में पलट गया पूरा फैसला कलेक्टर श्री वर्मा 15 जनवरी 2026 को अपने ही द्वारा जारी आदेश को पलटते नजर आए। या 31 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच हालात इतने बदल गए कि पूरा आदेश ही निरस्त करना पड़ा? क्या यह प्रशासनिक असमंजस है या फिर किसी दबाव, संरक्षण या सिफारिश का नतीजा? इस पूरे प्रशासनिक खेल का सबसे बड़ा नुकसान आश्रम के उन आदिवासी बच्चों को हो रहा है, जिनकी पढ़ाई पहले से ही शिक्षकों की कमी, बीएलओ ड्यूटी और अव्यवस्था से प्रभावित है। अब देखने वाली बात यह होगी कि, यदि ऐसे ही फैसले कागजों में बनते और मिटते रहे, तो कराहल का यह आदिवासी आश्रम शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रशासनिक अस्थिरता का उदाहरण बनकर रह जाएगा।

इस संबंध में अनुसूचित जनजाति विभाग के सहायक आयुक्त आरके गुप्ता का कहना है कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा.विकासखंड अधिकारी (बीईओ) को जांच के लिए भेजा गया है प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा कार्रवाई की जाएगी.

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