चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर अब मिल स्तर पर दिखाई देने लगा है. सोमवार को चीनी की एक्स-मिल कीमत करीब 30 प्रतिशत तक गिरकर 47 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई. इससे पहले 18 अगस्त को यही कीमत 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी. हालांकि, इस गिरावट का सीधा फायदा अभी आम ग्राहकों को नहीं मिल रहा है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि थोक बाजार में कीमतें तेजी से बदलती हैं, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका असर पहुंचने में कुछ समय लगता है.
पुराना स्टॉक बिकने के बाद घट सकते हैं खुदरा दाम
व्यापारियों के पास पहले से महंगी दरों पर खरीदा गया चीनी का स्टॉक मौजूद है. ऐसे में खुदरा दुकानदार पुराने माल को कम कीमत पर बेचकर नुकसान उठाना नहीं चाहते. यही वजह है कि मौजूदा स्टॉक खत्म होने तक बाजार में चीनी पुराने भाव पर ही बिक सकती है.
आमतौर पर एक दुकानदार के पास चीनी के करीब 10 से 15 बैग रहते हैं और प्रत्येक बैग का वजन 50 किलोग्राम होता है. जैसे ही कम कीमत पर नया माल बाजार में आएगा, उसके बाद खुदरा कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है. उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक खुदरा बाजार में नई कीमतों का असर आने में करीब 10 दिन लग सकते हैं.
घरेलू बाजार में पहुंचेगी रिफाइंड चीनी
मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह सरकार का वह फैसला भी है, जिसके तहत निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को अब घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है. अनुमान है कि अगले दो महीनों में करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सकती है.
इसके अलावा बड़ी मात्रा में चीनी खरीदने वाले थोक उपभोक्ताओं ने भी अपना स्टॉक कम करना शुरू कर दिया है. यह कदम सरकार की ओर से लागू किए गए नए स्टॉक नियमों के चलते उठाया गया है.
1 सितंबर से स्टॉक पर सख्ती
सरकार ने चीनी का स्टॉक रखने को लेकर नियम और कड़े कर दिए हैं. 1 सितंबर से महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक खरीदार लगातार 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे. इसके साथ ही मिलों द्वारा थोक ग्राहकों को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची जाने वाली चीनी की मात्रा की भी निगरानी की जाएगी.
उत्पादन घटा, फिर भी सरकार ने बताया पर्याप्त स्टॉक
चीनी उद्योग के अनुसार एक्स-मिल और थोक बाजार के भाव में सामान्य तौर पर 2 से 3 रुपये प्रति किलो का अंतर रहता है, जबकि मिल और खुदरा कीमतों के बीच करीब 7 से 8 रुपये प्रति किलो का अंतर देखा जाता है.
सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए मिलों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. हालांकि, विपणन वर्ष 2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. इसके बावजूद सालाना घरेलू खपत करीब 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है.
