झाबुआ,नावेद रजा/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के कुंदनपुर गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर चूक सामने आई। यहां एक 24 वर्षीय आदिवासी महिला को बारिश के दौरान समय पर एंबुलेंस न मिलने से सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।करीब आधे घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। परिवार महिला को स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहा था, तभी रास्ते में उसने बच्चे को जन्म दे दिया।इस दौरान आजाद पंवार, सूरज ठाकुर, सचिन राठौड़, आयुष चौहान, कार्तिक ठाकुर, प्रियांशु खराड़िया सहित अन्य युवक मौजूद थे और उन्होंने महिला की मदद की।
उन्होंने जिला पत्रकार संघ के संयोजक गोविंद सिंह ठाकुर को सूचना दी। गोविंद सिंह ठाकुर और पत्रकार कृष्णपाल सिंह ठाकुर तुरंत मौके पर पहुंचे।बारिश और ठंड की वजह से महिला सड़क पर कांप रही थी। तब गोविंद सिंह ठाकुर ने अपनी गाड़ी से कंबल निकालकर दिया। मौके पर पहुंची नर्स क्रिस्टीना गाणावा ने बच्चे की नाल काटी और महिला व बच्चे को सुरक्षित बचाया।यह घटना केवल उस महिला और उसके परिवार के लिए भयावह नहीं थी, बल्कि इसने मध्यप्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर किया।
यह भी पढ़ें –छीना झपटी कर वाहन छीनकर दहशत फैलाने वाले आरोपियो को थाना ऐशबाग पुलिस द्वारा किया गिरफ्तार – Khabar Digital
लंबे समय तक एंबुलेंस सेवा न मिलने से महिला की जान जोखिम में पड़ गई, जो सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता को दर्शाता है।लेख में कहा गया है कि अगर समय पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न हों, तो अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र पास होने के बावजूद मौत भी हो सकती है। यह घटना राज्य सरकार की जवाबदेही और तत्परता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, खासकर आदिवासी और पिछड़े इलाकों में।अंत में सवाल उठाया गया है कि आखिर कब स्वास्थ्य व्यवस्था आदिवासी और ग्रामीण जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी? और कब जिम्मेदार लोग इस तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे?


