उमरिया/केजी पांडेय/खबर डिजिटल/ देश भर में विलुप्त हो रही बैगा जनजाति के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनाकर उन्हें लाभांवित करने प्रयासरत हैं पर जब आदमी को ही मार डाला जाये तो वह लाभ कैसे लेगा, जिले में लगातार पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, कभी जिन्दा व्यक्ति अपने को मरा बता रहा है तो कहीं मृतकों को आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है, ऐसा ही एक मामला जन सुनवाई में सामने आया जिसने गुहार लगाकर अधिकारियों से कहा कि साहब मुझे जिन्दा कर दो, जिससे मुझे योजनाओं का लाभ मिलने लगे।
मेरे पंचायत के लोग मुझे मार डाले हैं – पीड़ित
मामला है करकेली जनपद के सहजनारा ग्राम पंचायत का जहां के रहवासी घमीरा बैगा पिछले 12 साल से मर चुके हैं, इन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जिसके कारण यह सैकड़ों बार जिला कलेक्टर की चौखट का दरवाजा खटखटा चुके हैं, पर समाधान शून्य ही रहा है, आज भी सरकार की जनसुनवाई में 80 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग हाथ पर आवेदन लेकर पहुंचा और दहाड़ मार बोला कि साहब अब मरने वाला हूं अब तो मुझे जिन्दा कर दो, मेरे पंचायत के लोग मुझे मार डाले हैं और अब मै बेसहारा हो गया हूं, खाने तक के लाले पड़े हुए हैं।
ये पहली कहानी नहीं
बहरहाल जो भी हो जिले भर में यह कोई पहली कहानी नहीं है हर मंगलवार की जन सुनवाई में ऐसा घटनाक्रम होता रहता है और जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगती। जिसके चलते अब सरकारी सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।


