देवास/पवन उपाध्याय/खबर डिजिटल/ देवास जिले के ग्राम चापड़ा में एक शव यात्रा मुख्य मार्गों से गुजरी तो चर्चाओं का विषय बन गई, देखने वाले हैरान थे शव यात्रा में फिल्मी गानों पर परिजन नाच रहे हैं, सजी धजी घोड़ी को नचाया जा रहा था, लोग रुपये न्यौछावर कर रहे थे फटाखे फोड़े जा रहे थे, अवसर था श्यामनगर चापडा निवासी 100 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर स्वर्ग सिधारे काशीराम कारीगर लोहार के निधन के बाद अंतिम यात्रा का।
पुत्रों, परिवार ने की अंतिम इच्छा पूरी
काशीराम कारीगर लोहार की अंतिम इच्छा थी कि उनकी शव यात्रा धूम-धाम से निकले। जिसके चलते उनके पुत्र और परिवार, युवा शवयात्रा में बैंड बाजों की धुन पर नाचते नजर आए और ढोल की थाप पर दो घोडियां थिरती हुई चल रही थीं। मृतक पिता की अंतिम इच्छा अनुसार बारात के रूप में शवयात्रा निकाली, अपना भरा पूरा परिवार में मृतक कांशीराम लोहे का कारीगर होकर अपना जीवन आनन्दमय रूप से जिया और इसीलिए उनकी अंतिम इच्छा अनुसार और 100 वर्ष की आयु उनके द्वारा पूर्ण करने के कारण यह अनोखी शवयात्रा चापड़ा के श्यामनगर से प्रारंभ होकर चापड़ा चौराहे सहित गांव के प्रमुख मार्गों से होती हुई मुक्तिधा’ पहुंची।
इंदौर के पास से बुलाई गई नाचने वाली घोड़िया
शवयात्रा में इंदौर’ के पास से शवयात्रा में नाचने वाली घोड़िया बुलाई गई, नाचने वाली दो घोड़ियों के साथ बैंड-बाजे शामिल थे। यात्रा में शामिल लोग गमगीन होने के बजाय घोडियों के ऊपर नोट उड़ाते और बैंड की धुन पर नाचते दिखाई दिए। यह दृश्य देखने के लिए रास्तेभर ग्रामीण जमा होते रहे, और हर किसी की जुबान पर यही चर्चा थी कि यह शवयात्रा है या बारात।
मृतक के पुत्र ने दी जानकारी
मृतक के पुत्र प्रहलाद के के अनुसार… पिता की इच्छा थी कि उनके निधन के बाद उनकी शवयात्रा बारात की तरह निकाली जाए। उन्होंने जीवनकाल में बेटों से यह बात कह दी थी और उनकी अंतिम इच्छा का पालन करते हुए पुत्रों ने यह अनोखी शवयात्रा निकाली। काशीराम के पांच पुत्र-जगदौश, प्रहलाद, तकेसिंह, कालू और भागीरथ हैं, जिन्होंने एकजुट होकर पिता की अंतिम इच्छा पूरी की।


