Rekha Yadav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ईंधन बचाओ और वीआईपी कल्चर खत्म करो की मुहिम को मध्य प्रदेश के अपने ही नेता चुनौती देते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के छतरपुर आगमन को लेकर खड़ा हुआ है, जहां उनके स्वागत में निकले दर्जनों वाहनों के काफिले ने शहर की रफ्तार थाम दी।
‘शोर’ और ‘जाम’
पहली बार छतरपुर पहुंचीं रेखा यादव का अभिनंदन करने के लिए समर्थकों ने उत्साह में नियमों और अपीलों को दरकिनार कर दिया। स्वागत के लिए दर्जनों चार पहिया वाहनों का एक बड़ा काफिला शहर की सड़कों पर निकला। भाजपा कार्यालय के सामने गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई, जिससे राहगीरों को घंटों जाम का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने बड़े काफिले को लेकर प्रशासन ने यातायात प्रबंधन के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे।
यादव होंगी बर्खास्त?
एक ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने खुद अपनी गाड़ियों की संख्या कम कर सादगी की मिसाल पेश की है, वहीं जिला स्तर पर नेताओं का यह शक्ति प्रदर्शन जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में संगठन ने कुछ नेताओं पर ऐसी हरकतों के लिए कार्रवाई भी की थी, लेकिन छतरपुर की इन तस्वीरों ने पार्टी की अनुशासनप्रिय छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में क्या संगठन रेखा यादव को पद से बर्खास्त करेगा। जैसे किसा मोर्चा जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह को बर्खास्त किया गया?
कांग्रेस का तंज
इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने भाजपा को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। जब खुद सत्ताधारी दल के नेता प्रधानमंत्री की बात नहीं मान रहे, तो आम जनता से त्याग की उम्मीद करना बेईमानी है। सादगी के निर्देश सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित रह गए हैं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर काफिले के वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा संगठन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। देखना होगा कि क्या इस मामले में भी शक्ति प्रदर्शन करने वाले नेताओं पर गाज गिरती है।
