सनातन परंपरा में किसी नए काम की शुरुआत से पहले शुभ समय और मुहूर्त का विचार किया जाता है. खासतौर पर नया कारोबार शुरू करने, निवेश करने या सोना-चांदी और दूसरी कीमती चीजें खरीदने के लिए शुभ नक्षत्र को महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों का वर्णन मिलता है, जिनमें पुष्य नक्षत्र को बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है. इसी वजह से इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है.
सितंबर 2026 में पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बनने वाला है. खास बात यह है कि यह शुभ नक्षत्र दो दिनों तक रहेगा. ऐसे में खरीदारी, निवेश और दूसरे शुभ कार्यों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सितंबर में इस समय रहेगा पुष्य नक्षत्र
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, सितंबर 2026 में पुष्य नक्षत्र की शुरुआत 7 सितंबर, सोमवार को शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगी. इसका समापन 8 सितंबर, मंगलवार को शाम 4 बजकर 39 मिनट पर होगा.
इस तरह पुष्य नक्षत्र का प्रभाव लगातार दो दिनों तक बना रहेगा. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों और खरीदारी से सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है.
खरीदारी और निवेश के लिए माना जाता है खास
पुष्य नक्षत्र को विशेष रूप से नई चीजें खरीदने और निवेश के लिए अनुकूल माना गया है. मान्यता है कि इस नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक उपयोगी रहती हैं और घर में शुभता लेकर आती हैं.
ज्योतिषीय परंपरा में विवाह को छोड़कर कई तरह के मांगलिक कार्यों के लिए पुष्य नक्षत्र को शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है. यही कारण है कि लोग इस दिन सोना, चांदी, वाहन, संपत्ति और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं.
दान और शुभ कार्यों का भी विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पुष्य नक्षत्र में किया गया दान भी विशेष पुण्य प्रदान करता है. ऐसा विश्वास है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है.
कुल मिलाकर सितंबर 2026 में पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र खरीदारी, निवेश और शुभ शुरुआत के लिहाज से खास माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी बड़े निवेश या महत्वपूर्ण कार्य के लिए अपनी व्यक्तिगत कुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की सलाह लेना बेहतर रहेगा.







